इंडिया ब्लॉक की बैठक पर एनडीए नेता बोले-बिखर चुका है इंडी गठबंधन
नई दिल्ली, 30 सितंबर (आईएएनएस)। एसआईआर, ईवीएम और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़े मुद्दे पर बुधवार को नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक पर एनडीए के नेताओं ने निशाना साधा। एनडीए नेताओं का दावा है कि इंडी गठबंधन बिखर चुका है।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इंडी गठबंधन बिखर चुका है। उसमें एकता नाम की कोई चीज नहीं है। यह भानुमति का कुनबा जोड़ने के बाद और उसके बिखरने का दृश्य पूरा देश देख चुका है।
यूपी सरकार के मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि उन लोगों का अपना एजेंडा है और बैठक का अपना अलग एजेंडा है। वे कब शामिल होंगे और कब क्या कहेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। जो वे कहते हैं वह करते नहीं, और जो करते हैं वह कहते नहीं हैं। इन लोगों का यह सब चलता रहता है। अखिलेश यादव और राहुल गांधी कब एक-दूसरे को क्या कह बैठेंगे, कह नहीं सकते। दूसरी तरफ हम लोगों का 10-12 साल से लगातार गठबंधन है। हम एक बेहतर व्यवस्था बनाकर और आपसी तालमेल के साथ पार्टी को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि जो लोग चुनाव में जनता के द्वारा पराजित हो गए हैं, वे हार का ठीकरा सीईसी पर, इलेक्शन कमीशन पर फोड़ते हैं। फ्रस्ट्रेशन में इस तरह का बयान देते हैं, जिस तरह का बयान तेजस्वी यादव दे रहे हैं, कांग्रेस के नेता दे रहे हैं। इनके बयानों से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। इलेक्शन कमीशन संवैधानिक संस्था है और बहुत अच्छे से वह काम कर रहा है। इंडी ब्लॉक नाम की कोई चीज है नहीं। न 'इंडी अलायंस' का कोई दफ्तर है, न कन्वेनर है, न कोई चेयरमैन है, न प्रेसिडेंट है। ये सिर्फ चाय-समोसा पार्टी है। यह कभी-कभी इकट्ठे होते हैं, उसमें एक-दो बिखर जाते हैं।
भाजपा सांसद भोला सिंह ने कहा कि लगातार देश में 63 साल कांग्रेस ने शासन किया। अभी भी हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड में कांग्रेस सत्ता में है और तमिलनाडु में कांग्रेस गठबंधन में शामिल है और सत्ता में है। लोकसभा में कांग्रेस के 100 सांसद हैं, जो उसी ईवीएम के द्वारा जनता ने चुनकर भेजे हैं। राहुल गांधी स्वयं रायबरेली से सांसद चुने गए हैं। अगर ईवीएम गड़बड़ थी या ईवीएम पर इनको भरोसा नहीं है, तो ये लोग कैसे जीतकर आए।
केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि वे चाहे कितनी भी बैठकें कर लें, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तरक्की कर रहा है और आगे भी करता रहेगा। वे चाहे कितनी भी कोशिशें कर लें, जनता सब जानती है। केंद्रीय राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार उस गठबंधन से पहले ही अलग हो चुके हैं जिसे बनाने में उन्होंने खुद मदद की।
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस महागठबंधन का हिस्सा थी और नीतीश कुमार को संयोजक बनाने का प्रस्ताव आया, तो उन्हें संयोजक नहीं बनाया गया, मानो किसी साजिश के तहत ऐसा किया गया हो। उन्हें संयोजक नहीं बनाया गया। इसलिए नीतीश कुमार ने अपना फैसला लिया और एनडीए गठबंधन में शामिल हो गए। अब नीतीश कुमार पर चर्चा करने का क्या मतलब है? इससे कोई फायदा नहीं है।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि हमने कई बार कहा है कि विपक्ष इस बात से बहुत खुश था कि मीडिया में ऐसी खबरें आईं जिनमें भारत निर्वाचन आयोग के तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की बात कही गई थी। हालांकि तीनों आयुक्तों ने स्थिति स्पष्ट कर दी और कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर उनके बीच कोई असहमति नहीं है। असल में, कैबिनेट सचिव के साथ उनका जो पत्राचार हुआ था, वह एक अधिकारी की पोस्टिंग से संबंधित था। अब, ये लोग जो बिना किसी ठोस मुद्दे के बस कोई न कोई बहाना ढूंढ रहे हैं। जहां वे जीतते हैं, तो वे चुनाव आयोग की बुराई नहीं करते लेकिन जहां वे हारते हैं, वहां वे हंगामा खड़ा करना शुरू कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि इंडिया ब्लॉक गठबंधन कई बार बिखर चुका है। उत्तर प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं और इंडिया गठबंधन के पास अपनी ताकत दिखाने का मौका हो सकता था लेकिन अखिलेश नदारद हैं। यह अब इंडिया गठबंधन के लिए चिंता का बड़ा कारण बन जाएगा।
भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि इंडिया गठबंधन की बैठक को झूठ और भ्रम फैलाने वाली बैठक कहा जा सकता है। जब वे चुनाव जीतते हैं, तो सब कुछ अच्छा होता है। ईवीएम, चुनाव आयोग, न्यायपालिका और लोकतंत्र। जब वे चुनाव हारते हैं, तो सब कुछ गलत हो जाता है। लोकतंत्र में ऐसा दोहरा मापदंड कैसे चल सकता है। चुनाव आयोग वोटर लिस्ट को ठीक कर रहा है, नकली और अयोग्य वोटरों को हटा रहा है। इस पर कोई कैसे आपत्ति कर सकता है।
बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि इंडिया गठबंधन में एकता जैसी कोई चीज नहीं है। एकता सिर्फ कागज पर दिखती है। हमने भी देखा है कि वे अभी भी इस बात से नाराज हैं कि हमने नीतीश कुमार का साथ छोड़ दिया और उन्हें संयोजक बनाया जाना चाहिए था। सोनिया गांधी समेत कुछ लोग अलग-अलग बातें कह रहे हैं और उनके बारे में टिप्पणी कर रहे हैं। तो, नीतीश कुमार को लेकर अभी भी टीस है। अगर कोई व्यक्ति जो आपके गठबंधन का हिस्सा नहीं है, वह अभी भी चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है, तो समझ लीजिए कि इंडिया गठबंधन में कोई नेता या नेतृत्व नहीं है। हर कोई खुद को नेता मानता है।
बिहार जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि महागठबंधन कहां है? क्या इंडिया गठबंधन है? हो सकता है कि यह कागजों पर हो लेकिन हम इसे अस्तित्व में नहीं मानते। जबसे नीतीश कुमार इससे अलग हुए, यह उसी पल खत्म हो गया।
आंध्र प्रदेश से भाजपा नेता विनूषा ने कहा कि इंडी गठबंधन दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए बैठक कर रहा है। मैं एक सवाल पूछना चाहती हूं कि डीएमके नेता एमके स्टालिन कहां हैं? आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल कहां हैं? वे पहले ही इंडी गठबंधन से दूरी बना चुके हैं। एनसी प्रमुख उमर अब्दुल्ला और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख व झारखंड के मुख्यमंत्री जैसे अन्य नेता कहां हैं? वे वहां मौजूद नहीं हैं। खबर है कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव भी बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं और अपने प्रतिनिधि भेज रहे हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना भी अपने प्रतिनिधि भेज रही है या खबर है कि वे ऑनलाइन बैठक में शामिल हो रहे हैं।
कर्नाटक से भाजपा नेता सीटी रवि ने कहा कि मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि एसआईआर किसके जमाने में लागू की गई? 1952 में क्या भाजपा सरकार थी? तब से लेकर आज तक 8वीं बार एसआईआर हो रही है। मरे हुए लोगों को हटाना गलत है क्या? फर्जी वोट हटाना गलत है क्या? कांग्रेस बांग्लादेशी और पाकिस्तानी वोट रहने देना चाहती है। क्या ऐसा हो सकता है? यह अकेले सीईसी ज्ञानेश कुमार का काम नहीं है, बीएलओ का काम है। बीएलओ कौन होता है? 90 प्रतिशत स्कूल टीचर्स होते हैं। पारदर्शिता से एसआईआर का काम हो रहा है। किसी का वोट कटा है तो वह दोबारा एप्लीकेशन दे सकते हैं। ऑब्जेक्शन कर सकते हैं। इसके बाद भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगा रहे हैं, अगर उनके खिलाफ सबूत है तो कोर्ट जा सकते हैं।
भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि यह इंडिया गठबंधन क्या है? इस बैठक से क्या हासिल होगा? जिस तरह से वे ज्ञानेश कुमार पर इतना 'ज्ञान' दे रहे हैं, अगर उन्होंने अपने गठबंधन सहयोगियों को इसका आधा ज्ञान भी दिया होता, तो उनके सहयोगी साथ नहीं छोड़ते। यह गठबंधन नहीं है बल्कि यह 'लठबंधन' है, 'ठगबंधन' है। वे बस हाथ मिलाएंगे और गले मिलेंगे लेकिन उनके दिल एक नहीं हैं। अखिलेश यादव ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है और आम आदमी पार्टी ने भी मना कर दिया है।
--आईएएनएस
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