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इंडिया ब्लॉक की बैठक से पहले सीपीआई (एम) का कांग्रेस को पत्र, केरल चुनाव में लगाए गए आरोपों पर मांगा जवाब

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। इंडिया ब्लॉक की 8 जून को प्रस्तावित बैठक से पहले वामपंथी दल सीपीआई (एम) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक पत्र लिखकर केरल विधानसभा चुनाव के दौरान लगाए गए आरोपों पर नाराजगी जताई है।
इंडिया ब्लॉक की बैठक से पहले सीपीआई (एम) का कांग्रेस को पत्र, केरल चुनाव में लगाए गए आरोपों पर मांगा जवाब

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। इंडिया ब्लॉक की 8 जून को प्रस्तावित बैठक से पहले वामपंथी दल सीपीआई (एम) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक पत्र लिखकर केरल विधानसभा चुनाव के दौरान लगाए गए आरोपों पर नाराजगी जताई है।

पार्टी महासचिव एमए बेबी ने कहा कि इन आरोपों से इंडिया ब्लॉक की एकता और उद्देश्य पर सवाल उठते हैं, इसलिए कांग्रेस नेतृत्व को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

एमए बेबी ने पत्र में लिखा कि उन्हें कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के माध्यम से 8 जून को इंडिया ब्लॉक की बैठक की जानकारी मिली। इस संदर्भ में उन्होंने केरल विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा चलाए गए उस अभियान का जिक्र किया, जिसमें सीपीआई (एम) और भाजपा के बीच कथित समझौते के आरोप लगाए गए थे।

उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं ने बार-बार यह आरोप लगाया कि सीपीआई (एम) और भाजपा के बीच कोई गुप्त समझौता है। इतना ही नहीं, तत्कालीन मुख्यमंत्री और सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो सदस्य पिनाराई विजयन पर भी प्रधानमंत्री के साथ समझौते का आरोप लगाया गया। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया था कि आखिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिनाराई विजयन से पूछताछ या गिरफ्तारी क्यों नहीं की।

पत्र में कहा गया कि ये आरोप चुनावी के समय दिए गए सामान्य बयान नहीं थे, बल्कि कांग्रेस के पूरे चुनाव अभियान का मुख्य आधार थे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने इन आरोपों को बार-बार दोहराया।

एमए बेबी ने याद दिलाया कि इंडिया ब्लॉक का गठन भाजपा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई के लिए हुआ था और सीपीआई (एम) ने 2023 की पटना बैठक से ही इस मंच को मजबूत करने में ईमानदारी से योगदान दिया है। ऐसे में सीपीआई (एम) को भाजपा का सहयोगी बताना बेहद गंभीर और अस्वीकार्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि केरल में आरएसएस-भाजपा के खिलाफ संघर्ष में सीपीआई (एम) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बलिदान दिया है। पिछले 10 वर्षों के वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) शासन में राज्य में कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ, जो पार्टी की धर्मनिरपेक्ष प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

हालांकि, पत्र के अंत में सीपीआई (एम) ने स्पष्ट किया कि वह संसद के भीतर इंडिया ब्लॉक और अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर केंद्र सरकार के खिलाफ संयुक्त संघर्ष जारी रखेगी।

--आईएएनएस

वीकेयू/

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