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सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने से आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने पर रोक लगेगी : एक्सपर्ट

नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। सोने पर कस्टम ड्यूटी और सेस में बढ़ोतरी से आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने पर रोक लगेगी। यह जानकारी एक्सपर्ट की ओर से बुधवार को दी गई।
सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़ने से आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने पर रोक लगेगी : एक्सपर्ट

नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। सोने पर कस्टम ड्यूटी और सेस में बढ़ोतरी से आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा के बाहर जाने पर रोक लगेगी। यह जानकारी एक्सपर्ट की ओर से बुधवार को दी गई।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के गुजरात प्रेसिडेंट नैनेश पच्चीगर ने कहा कि सरकार ने कस्टम ड्यूटी (सेस सहित) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इसमें बेसिक कस्टम ड्यूटी को 5 से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एआईडीसी) को एक प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार के इस फैसले से सोने के आयात में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा के देश से बाहर जाने से रोकने में मदद मिलेगी।

पच्चीगर ने आगे कहा कि कस्टम ड्यूटी बढ़ने से सोने की ज्वेलरी की कीमत में भी इजाफा होगा और इससे ग्राहक पहले के मुकाबले कम आएंगे और ज्वेलरी की बिक्री में भी गिरावट आएगी।

पच्चीगर के मुताबिक, सरकार को सोने के आयात को कम करने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (जीएमएस) को दोबारा से शुरू करना चाहिए। इससे देश में पुराना सोना बाहर आएगा और इससे कारीगरों को भी अपना जीवन यापन करने में मदद मिलेगी।

कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई है।

आईबीजेए की ओर से दोपहर को जारी की गई कीमतों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 8,779 रुपए बढ़कर 1,60,411 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है।

22 कैरेट सोने का दाम 1,38,895 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,46,936 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। 18 कैरेट 1,13,724 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1,20,308 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।

सरकारी सूत्रों ने बुधवार को बताया कि कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में वृद्धि विदेशी मुद्रा की बचत, चालू खाते की सुरक्षा, आवश्यक आयातों को प्राथमिकता देने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाने के उद्देश्य से अपनाई गई सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। साथ ही कहा कि इसमें व्यापक आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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