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1 अप्रैल से बदलेगा इनकम टैक्स सिस्टम: जानिए आपकी जेब पर कितना और क्या-क्या पड़ेगा असर

नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है, जो नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। यह नया कानून 64 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि इससे टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाया जाएगा। हालांकि टैक्स दरों या स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनका असर नौकरीपेशा लोगों, निवेशकों और व्यवसायियों पर पड़ेगा।
1 अप्रैल से बदलेगा इनकम टैक्स सिस्टम: जानिए आपकी जेब पर कितना और क्या-क्या पड़ेगा असर

नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है, जो नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। यह नया कानून 64 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि इससे टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाया जाएगा। हालांकि टैक्स दरों या स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं, जिनका असर नौकरीपेशा लोगों, निवेशकों और व्यवसायियों पर पड़ेगा।

देशव्यापी जागरूकता अभियान 'प्रारंभ 2026' के लॉन्च के दौरान बीते शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह नया टैक्स ढांचा छोटे करदाताओं के लिए अनुपालन को काफी आसान बनाएगा और मुकदमेबाजी को कम करने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि भारत के छोटे कारोबारी और पेशेवर 'अर्थव्यवस्था की असली ताकत' हैं।

वित्त मंत्री ने बताया कि नया कानून इस तरह तैयार किया गया है कि इससे त्रुटियां, विवाद और अनुपालन लागत कम हो सके और लोगों का व्यवहार 'कन्फ्यूजन से कंप्लायंस' की ओर बदले। उन्होंने यह भी कहा कि मुकदमेबाजी को कम करना इस नए ढांचे का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।

नए अधिसूचित नियमों में सैलरी पर टैक्स, अनुपालन रिपोर्टिंग, ट्रांसफर प्राइसिंग और विदेशी टैक्स क्रेडिट से जुड़े कई बदलाव शामिल किए गए हैं।

नए नियमों के तहत अब 'फाइनेंशियल ईयर' और 'असेसमेंट ईयर' की जगह सिर्फ एक ही 'टैक्स ईयर' होगा। इससे टैक्स भरने की प्रक्रिया आसान होगी और लोगों को अलग-अलग टर्म समझने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही रिटर्न फाइल करने की समयसीमा भी तय कर दी गई है, जिसमें साधारण आईटीआर के लिए 31 जुलाई, बिजनेस और प्रोफेशन वालों के लिए 31 अगस्त, जबकि ऑडिट वाले मामलों में 31 अक्टूबर तक रिटर्न भरना होगा। खास परिस्थितियों में यह समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ सकती है। इसके अलावा अब टैक्स ईयर खत्म होने के 12 महीने तक संशोधित रिटर्न फाइल किया जा सकेगा।

हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। अब कर्मचारियों को छूट पाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के संबंध की जानकारी देना अनिवार्य होगा। अच्छी बात यह है कि अब मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई के साथ हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु में रहने वाले कर्मचारियों को सैलरी के 50 प्रतिशत तक एचआरए छूट मिलेगी। बाकी शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत ही रहेगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 1 लाख रुपए से ज्यादा किराया देता है, तो उसे मकान मालिक का पैन देना जरूरी होगा।

नए कानून के तहत, कुछ शर्तों के साथ 10 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले व्यवसायों को विस्तृत लेखा-बही (बुक्स ऑफ अकाउंट) रखने और ऑडिट कराने से छूट दी जाएगी। यह कारोबारियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

नए नियमों के तहत कंपनी द्वारा दिए गए घर (परक्विजिट) की टैक्स वैल्यू घटा दी गई है। अब यह शहर की आबादी के आधार पर तय होगी—40 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सैलरी का 10 प्रतिशत, मध्यम शहरों में 7.5 प्रतिशत और छोटे शहरों में 5 प्रतिशत। इससे पहले यह दर 15 प्रतिशत तक थी, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

कंपनी की कार के इस्तेमाल पर भी टैक्स नियम बदले हैं। अगर कर्मचारी कार का निजी और ऑफिस दोनों कामों में उपयोग करता है, तो 1.6 लीटर तक की कार पर 5,000 रुपए और उससे बड़ी कार पर 7,000 रुपए प्रति माह टैक्सेबल वैल्यू मानी जाएगी। अगर कंपनी ड्राइवर देती है, तो इसमें 3,000 रुपए और जुड़ेंगे।

कर्मचारियों को मिलने वाले फूड और बेवरेज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 200 रुपए प्रति मील कर दी गई है, जो पहले 50 रुपए थी। वहीं कंपनी द्वारा दिए गए गिफ्ट या वाउचर अब 15,000 रुपए तक टैक्स-फ्री होंगे।

इसके साथ ही, बच्चों के एजुकेशन अलाउंस पर भी बड़ी राहत दी गई है। अब हर महीने 3,000 रुपए तक टैक्स छूट मिलेगी (अधिकतम दो बच्चों के लिए)। हॉस्टल अलाउंस पर 9,000 रुपए प्रति माह तक छूट मिलेगी, जो पहले काफी कम थी।

नई व्यवस्था में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी निवेश को कितने समय तक रखा गया, यह कैसे तय होगा। खासकर कन्वर्ट होने वाली सिक्योरिटीज (जैसे बॉन्ड से शेयर) के मामले में अब पहले की होल्डिंग अवधि को भी जोड़ा जाएगा। इससे यह तय करना आसान होगा कि लाभ शॉर्ट टर्म है या लॉन्ग टर्म।

नया आयकर कानून आम लोगों के लिए टैक्स प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जहां एक तरफ नियमों में सख्ती लाई गई है, वहीं दूसरी तरफ कई जगह राहत भी दी गई है। इससे टैक्स फाइलिंग आसान होगी, विवाद कम होंगे और लोगों को बेहतर तरीके से अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग करने में मदद मिलेगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

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