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वीडियो में जस्टिस अभय ओका बोले- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राजनीतिक दबदबे से मुक्त हो, स्वतंत्र संस्थाओं की सुरक्षा जरूरी

वीडियो में जस्टिस अभय ओका बोले- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राजनीतिक दबदबे से मुक्त हो, स्वतंत्र संस्थाओं की सुरक्षा जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अभय ओका ने कहा है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राजनीतिक दबदबे से मुक्त होनी चाहिए। इसके लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था बनाने के साथ स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को लोकतंत्र की बुनियाद बताते हुए संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों में जवाबदेही की आवश्यकता पर जोर दिया।

जस्टिस अभय ओका रविवार को महाराष्ट्र के ठाणे में ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड अस’ विषय पर आयोजित एक व्याख्यान में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में राजनीतिक प्रभाव पर सवाल

जस्टिस ओका ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिस पर राजनीतिक दबदबे का असर न पड़े। लोकतंत्र में चुनाव कराने वाली संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए ऐसी कानूनी व्यवस्था आवश्यक है, जो नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाए।

उन्होंने स्वतंत्र संस्थाओं की सुरक्षा के लिए मजबूत ढांचे की जरूरत पर भी जोर दिया। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है, ताकि नागरिकों का संस्थाओं पर भरोसा कायम रहे।उनकी टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब संवैधानिक पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया और संस्थाओं की स्वायत्तता को लेकर सार्वजनिक चर्चा होती रहती है।

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद

जस्टिस अभय ओका ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि नागरिक अपने मताधिकार का इस्तेमाल स्वतंत्र रूप से कर सकें।

चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका केवल चुनाव आयोजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और भरोसा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से इन संस्थाओं की स्वतंत्रता और नियुक्तियों में जवाबदेही पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जोड़ते हुए मजबूत कानूनी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता बताई।

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