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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के साथ भेदभाव, वीडियो में देंखे अब मिलेगी पूरी पेंशन

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के साथ भेदभाव, वीडियो में देंखे अब मिलेगी पूरी पेंशन

नई दिल्ली में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए सशस्त्र बलों की महिला अधिकारियों के अधिकारों को लेकर बड़ा संदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत कार्यरत महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि प्रणाली में मौजूद भेदभाव का परिणाम था।

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि महिला अधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन पहले से तय इस धारणा के आधार पर किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन (PC) नहीं दिया जाएगा। इस पूर्वाग्रह का असर उनके करियर मूल्यांकन पर पड़ा, जिससे कई योग्य महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन से वंचित रहना पड़ा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन महिला अधिकारियों को गलत या मनमाने मूल्यांकन के कारण स्थायी कमीशन नहीं मिला, उन्हें अब न्याय के तहत पूरी पेंशन का लाभ दिया जाएगा। यह फैसला उन सभी महिला अधिकारियों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्होंने वर्षों तक सशस्त्र बलों में सेवा दी, लेकिन भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण उन्हें उचित सम्मान और लाभ नहीं मिल पाया।

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि इन महिला अधिकारियों की 20 साल की न्यूनतम सेवा को अब पूर्ण माना जाएगा, भले ही उन्होंने इससे पहले ही सेवा छोड़ दी हो। इस निर्णय का उद्देश्य उन सभी अधिकारियों को समान अधिकार देना है, जिन्हें पहले प्रणालीगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था।

यह फैसला न केवल महिला अधिकारियों के लिए एक बड़ी जीत है, बल्कि सशस्त्र बलों में समानता और न्याय की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से भविष्य में रक्षा सेवाओं में महिलाओं के प्रति सोच और नीतियों में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

कई महिला अधिकारियों ने लंबे समय से स्थायी कशन और उसके लाभों की मांग की थी, जिसमें पेंशन और करियर स्थिरता शामिल है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय उन सभी संघर्षों को मान्यता देता है और एक मजबूत कानूनी आधार प्रदान करता है। इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि रक्षा सेवाओं में लैंगिक समानता को और मजबूती मिलेगी और महिला अधिकारियों को भी पुरुष अधिकारियों के समान अवसर और सम्मान प्राप्त होगा।

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