अवैध रोहिंग्याओं पर कसेगा शिकंजा: सरकार का बड़ा फैसला, बायोमेट्रिक डेटा और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू
जम्मू में रोहिंग्या बस्तियों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई तेज होती दिखाई दे रही है। 16 सितंबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, जम्मू के नरवाल इलाके में रोहिंग्या आबादी वाली एक बस्ती में कार्रवाई की गई और वहां बनी कुछ दुकानें व झुग्गियां हटाई गईं।यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब जम्मू-कश्मीर में विदेशी नागरिकों, विशेषकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच और चर्चा चल रही है। अगस्त 2026 में केंद्र द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय पैनल ने जम्मू का दौरा कर जनसांख्यिकीय बदलाव से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न पक्षों से जानकारी ली थी। पैनल ने नरवाल स्थित रोहिंग्या बस्ती का भी निरीक्षण किया था।
मकान और जमीन मालिकों पर भी नजर
रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन की कार्रवाई का एक पहलू उन मकान और जमीन मालिकों से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी संपत्ति किराए पर दी है। अधिकारियों की ओर से किरायेदारों और संपत्तियों से संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया भी चल रही है।
जम्मू जिला प्रशासन की वेबसाइट पर जुलाई 2026 में निजी क्षेत्र और कारोबारी प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों तथा किरायेदारों की जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने से जुड़ा आदेश भी प्रकाशित हुआ था।
बस्तियों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ी
कार्रवाई के बाद इन बस्तियों में रहने वाले परिवारों के सामने आगे रहने की जगह को लेकर चिंता पैदा हुई है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि प्रभावित लोगों का कहना है कि अगर उन्हें मौजूदा जगह खाली करनी पड़ी तो उनके सामने रहने और रोजमर्रा की जिंदगी चलाने की मुश्किल खड़ी हो सकती है।
हालांकि, प्रशासन की कार्रवाई किन-किन बस्तियों और व्यक्तियों पर लागू होगी, यह संबंधित नोटिस और स्थानीय प्रशासन के आदेशों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
जम्मू में रोहिंग्या आबादी को लेकर पहले भी हुई है कार्रवाई
जम्मू में रोहिंग्या नागरिकों की मौजूदगी नया मुद्दा नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू और सांबा जिलों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों समेत 13,700 से ज्यादा विदेशी नागरिक रह रहे थे। अगस्त 2026 में सरकारी पैनल को दिए गए आंकड़ों में यह भी बताया गया कि 2008 से 2016 के बीच इनकी संख्या में वृद्धि हुई थी।
2021 में जम्मू शहर में सत्यापन अभियान के दौरान 270 से ज्यादा रोहिंग्या लोगों को पकड़े जाने और उन्हें कठुआ सब-जेल के होल्डिंग सेंटर में रखने की कार्रवाई भी हुई थी।
कार्रवाई के बीच कानूनी प्रक्रिया भी अहम
ऐसी कार्रवाई में संबंधित लोगों की कानूनी स्थिति, जमीन या मकान की स्थिति और प्रशासन की ओर से जारी नोटिस महत्वपूर्ण होते हैं। जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक जमीन या सरकारी संपत्ति पर कथित अनधिकृत कब्जे के मामलों में कानून के तहत नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया का प्रावधान है।
फिलहाल जम्मू में रोहिंग्या बस्तियों पर कार्रवाई को लेकर आगे प्रशासन क्या कदम उठाता है और कितने इलाकों पर इसका असर पड़ता है, इस पर नजर बनी हुई है।

