आईआईटी दिल्ली के 650 एल्युमनी सिविल सर्वेंट, 270 से ज्यादा आईएएस अधिकारी
नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। वर्तमान में आईआईटी के 650 से अधिक अल्युमनी सिविल सर्विसिस में हैं। इनमें 270 से अधिक आईएएस अधिकारी हैं। 100 से अधिक आईपीएस, आईआरएस और आईएफएस अधिकारी हैं। आईआईटी दिल्ली के लगभग 10,000 अल्युमनी बैंकिंग और वित्त, विनिर्माण और इंजीनियरिंग उद्योग में नेतृत्व वाले पदों पर आसीन हैं। इनमें से 70 प्रतिशत अल्युमनी भारत में रहते हैं। वहीं एक हजार से अधिक अल्युमनी बड़ी और विविध कॉर्पोरेट सिस्टम्स के बोर्डरूम में कार्यरत हैं। यह जानकारी आईआईटी की ‘एल्युमनी इम्पैक्ट रिपोर्ट' में सामने आई है।
आईआईटी दिल्ली ने मंगलवार को अपनी पहली ‘एल्युमिनी इम्पैक्ट रिपोर्ट’ जारी की। यह रिपोर्ट संस्थान की स्थापना से अब तक इसके 65,000 से अधिक पूर्व विद्यार्थियों की असाधारण यात्रा और योगदान को रेखांकित करने वाला एक व्यापक दस्तावेज है। 'एल्युमिनी इम्पैक्ट रिपोर्ट' का अनावरण आईआईटी दिल्ली के एक पूर्व विद्यार्थी डॉ. गुरतेज एस. संधू और आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने किया।
दरअसल, आईआईटी दिल्ली ने 68वां स्थापना दिवस मनाया। इसी अवसर पर यह रिपोर्ट जारी की गई है। इस मौके पर डॉ. गुरतेज एस. संधू ने कहा, “पूर्व विद्यार्थियों को हमेशा अगली पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए रोल मॉडल के तौर पर देखा जाता है। साथ ही, वे संस्थानों को कई तरह से योगदान दे सकते हैं। यह योगदान सिर्फ वित्तीय सहायता, तक सीमित नहीं है, लेकिन यह उससे काफी अधिक हो सकता है, जैसे कि मार्गदर्शन देकर, अपनी कंपनियों, अपने संस्थानों और जहां कहीं भी वे काम कर रहे हैं, उनके माध्यम से आईआईटी से जुड़कर। आईआईटी की प्रतिष्ठा विश्वव्यापी है। लोग आईआईटी दिल्ली को जानते हैं, और अल्युमनी आईआईटी की इस पहचान को और सुदृढ़ करने में मदद करते हैं।”
वहीं, इस मौके पर प्रो. रंगन बनर्जी ने संस्थान के पूर्व विद्यार्थियों द्वारा देश और दुनिया के लिए किए गए योगदान के बारे में बताया। प्रो. बनर्जी ने कहा कि संस्थान द्वारा जारी 'एल्युमनी इम्पैक्ट रिपोर्ट' इस तथ्य को उजागर करती है कि आईआईटी दिल्ली से उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों ने 65 से अधिक वर्षों में, वैश्विक लीडर्स, अग्रणी उद्यमियों और समर्पित लोक सेवकों के रूप में दुनिया भर में गहरा आर्थिक और सामाजिक प्रभाव डाला है।
प्रो. बनर्जी ने कहा कि आईआईटी दिल्ली का प्राथमिक उद्देश्य शुरू से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उद्योगों से जुड़ना रहा है। अपने आरंभिक वर्षों से तकनीकी शिक्षा में वैश्विक अग्रणी के रूप में अपनी वर्तमान स्थिति तक, आईआईटी दिल्ली वैश्विक 'यूनिकॉर्न' ईकोसिस्टम के लिए एक प्राथमिक इंजन रहा है। रिपोर्ट में इस संस्थान से उत्तीर्ण 2,500 से अधिक विभिन्न कंपनियों के संस्थापकों और सह-संस्थापकोंका उल्लेख है।
रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी दिल्ली के पूर्व विद्यार्थियों ने आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में चुनिंदा प्रमुख ब्रांड बनाने में अहम भूमिका निभाई है। 4.8 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार सृजन में योगदान दिया है। रिपोर्ट में वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आईआईटी के पूर्व छात्रों व उद्योग जगत के दिग्गजों और उद्यम पूंजीपतियों का भी उल्लेख है। राष्ट्र के स्तम्भ स्टार्टअप की दुनिया से परे, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली का प्रभाव भारतीय शासन व्यवस्था और वैश्विक शिक्षा के क्षेत्र में भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
वहीं, आईआईटी दिल्ली के 250 से ज्यादा पूर्व छात्र भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, नियामक निकायों और वैज्ञानिक मिशनों में उच्च पदों पर आसीन हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा में भी संस्थान का योगदान उतना ही महत्वपूर्ण है। आईआईटी दिल्ली में नौसेना निर्माण विंग ने भारतीय नौसेना के लिए 700 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 50 से अधिक पूर्व विद्यार्थी क्यूएस शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में फैकल्टी के रूप में कार्यरत हैं, जबकि 300 से अधिक पूर्व विद्यार्थी अन्य आईआईटी में फैकल्टी के पदों पर हैं।
रिपोर्ट में आईआईटी दिल्ली के अक्षय निधि की सफलता पर भी प्रकाश डाला गया है। यह वह निधि है जो पूर्व विद्यार्थी संस्थान में रिसर्च के विकास के लिए देते हैं। वर्तमान में, निधि में पूर्व छात्रों द्वारा 477 करोड़ रुपए के दान के वादे दर्ज हैं। इनमें से 338 करोड़ रुपए पहले ही आईआईटी को मिल चुके हैं। आईआईटी दिल्ली के 2000 बैच ने दिसंबर 2025 में अपने सिल्वर जुबली रीयूनियन के दौरान 70 करोड़ रुपए से ज्यादा देने का वादा किया है। इससे रिसर्चर्स को 75 से ज्यादा अकादमिक चेयर्स और 115 से ज्यादा पुरस्कार मिल रहे हैं।
वहीं, योग्य विद्यार्थियों की सहायता के लिए 137 से ज्यादा छात्रवृत्ति और अंतरराष्ट्रीय यात्रा अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।
--आईएएनएस
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