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असली मर्दानगी की पहचान: जो दुनिया से नहीं, केवल भगवान से डरता है, Video Viral

असली मर्दानगी की पहचान: जो दुनिया से नहीं, केवल भगवान से डरता है, Video Viral

आज के दौर में “मर्दानगी” की परिभाषा को अक्सर ताकत, आक्रामकता और दबदबे से जोड़कर देखा जाता है। समाज में यह धारणा बनती जा रही है कि जो व्यक्ति किसी से नहीं डरता, वही असली मर्द है। लेकिन इस सोच के बीच एक विचार तेजी से चर्चा में है—असली मर्द वही होता है जो दुनिया से नहीं, बल्कि केवल भगवान से डरता है। यह कथन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि नैतिकता, आत्मसंयम और जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।

धार्मिक और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि ईश्वर का भय इंसान को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाता है। यह डर किसी दंड का नहीं, बल्कि गलत कर्म करने से रोकने वाला आंतरिक नियंत्रण होता है। जब व्यक्ति यह मानता है कि उसके हर कर्म का हिसाब ईश्वर के सामने देना है, तो वह अन्याय, छल, हिंसा और अहंकार से दूरी बनाकर चलता है। यही सोच उसे सही रास्ते पर बनाए रखती है।

आज समाज में कई समस्याओं की जड़ यह है कि लोग किसी से नहीं डरते—न कानून से, न समाज से और न ही नैतिक मूल्यों से। ऐसे में ईश्वर का भय ही वह शक्ति बनता है जो व्यक्ति को भीतर से रोकता है। असली मर्द वही होता है जो अपनी ताकत का इस्तेमाल कमजोर को दबाने में नहीं, बल्कि उसकी रक्षा करने में करता है। यह समझ ईश्वर के प्रति आस्था और डर से ही आती है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जो व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति जवाबदेह महसूस करता है, वह ज्यादा संतुलित और संवेदनशील होता है। ईश्वर का भय इंसान को यह एहसास कराता है कि वह अकेला नहीं है और उसके हर निर्णय का प्रभाव सिर्फ उसी पर नहीं, बल्कि समाज पर भी पड़ता है। यही भावना उसे जिम्मेदार नागरिक और बेहतर इंसान बनाती है।

धार्मिक ग्रंथों और संतों की शिक्षाओं में भी यही संदेश मिलता है कि सच्ची ताकत दूसरों को डराने में नहीं, बल्कि खुद को अनुशासित रखने में है। भगवान से डरने का अर्थ है सत्य, धर्म और न्याय के मार्ग पर चलना। ऐसा व्यक्ति दिखावे की बहादुरी नहीं करता, बल्कि चरित्र की मजबूती पर विश्वास रखता है।

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