IAF को मिले पहले 3 स्वदेशी HTT-40 ट्रेनर विमान, वीडियो में जाने नए पायलटों की ट्रेनिंग शुरू होने में लग सकते हैं 2 साल
भारतीय वायुसेना को स्वदेशी विमान निर्माण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मिली है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारतीय वायुसेना (IAF) को पहले तीन HTT-40 बेसिक ट्रेनर विमान सौंप दिए हैं। इन विमानों का इस्तेमाल नए पायलटों को शुरुआती उड़ान प्रशिक्षण देने के लिए किया जाएगा। हालांकि, इनसे नए पायलटों की नियमित ट्रेनिंग शुरू होने में करीब दो साल तक का समय लग सकता है। इसकी वजह विमानों की पर्याप्त संख्या जुटाना और फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स को प्रशिक्षित करना है।
25 से 30 विमानों का बेड़ा तैयार करने की योजना
HAL ने 18 सितंबर को बेंगलुरु में पहली बार HTT-40 विमानों की डिलीवरी दी थी। अब इन विमानों को वायुसेना की प्रशिक्षण व्यवस्था में शामिल करने की तैयारी है। शुरुआती चरण में वायुसेना इनका इस्तेमाल फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स को प्रशिक्षण देने के लिए करेगी।नए पायलटों की नियमित ट्रेनिंग शुरू करने से पहले वायुसेना लगभग 25 से 30 HTT-40 विमानों का बेड़ा तैयार करना चाहती है। इसके साथ ही प्रशिक्षकों को विमान की उड़ान, संचालन प्रक्रियाओं और प्रशिक्षण संबंधी मानकों की जानकारी दी जाएगी।प्रशिक्षक नए पायलटों को प्रशिक्षण देने के लिए जरूरी पाठ्यक्रम और मानक संचालन प्रक्रियाएं तैयार करने में भी भूमिका निभाएंगे। इन तैयारियों के बाद ही विमानों को शुरुआती पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़े स्तर पर शामिल किया जा सकेगा।
‘अंकुर’ नाम से जाना जाएगा HTT-40
HTT-40 का पूरा नाम हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 है। इसे भारतीय रक्षा सेवाओं की शुरुआती पायलट प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। इस विमान को ‘अंकुर’ नाम दिया गया है।यह टर्बोप्रॉप इंजन से चलने वाला बेसिक ट्रेनर विमान है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि नए पायलट कम गति पर विमान को संभालने और उड़ान की बुनियादी तकनीक सीख सकें।
HTT-40 में आधुनिक कॉकपिट और एवियोनिक्स सिस्टम लगाए गए हैं। यह विमान सामान्य उड़ान अभ्यास, एरोबेटिक्स, इंस्ट्रूमेंट फ्लाइंग, नेविगेशन, रात में उड़ान और फॉर्मेशन फ्लाइंग जैसे प्रशिक्षण कार्यों के लिए बनाया गया है। इसमें प्रशिक्षक और प्रशिक्षु के बैठने की व्यवस्था एक के पीछे एक है।
70 विमानों के लिए हुआ है करार
रक्षा मंत्रालय ने HAL को 70 HTT-40 विमानों की आपूर्ति का अनुबंध दिया है। इस खरीद की कुल कीमत लगभग 6,828 करोड़ रुपये बताई गई है। पहले तीन विमानों की डिलीवरी इसी अनुबंध के तहत हुई है।इन विमानों की आपूर्ति से वायुसेना को भविष्य में पायलट प्रशिक्षण के लिए घरेलू स्तर पर विकसित एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। इससे शुरुआती प्रशिक्षण के लिए जरूरी विमानों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।हालांकि, विमानों की डिलीवरी और उनका नियमित प्रशिक्षण में इस्तेमाल शुरू होना दो अलग-अलग चरण हैं। इसके लिए पर्याप्त विमान, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं का तैयार होना जरूरी है।
पहले भी स्वदेशी ट्रेनर विमानों का इस्तेमाल कर चुकी है वायुसेना
HTT-40 भारतीय वायुसेना का पहला स्वदेशी ट्रेनर विमान नहीं है। इससे पहले वायुसेना HAL के HPT-32 ‘दीपक’ जैसे स्वदेशी ट्रेनर विमानों का इस्तेमाल कर चुकी है।फिलहाल नए पायलटों के शुरुआती उड़ान प्रशिक्षण में स्विस कंपनी पिलाटस के PC-7 Mk II विमानों का इस्तेमाल किया जाता है। शुरुआती प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पायलटों को उनकी भूमिका के अनुसार लड़ाकू विमान, परिवहन विमान या हेलिकॉप्टर से जुड़े प्रशिक्षण के अगले चरणों में भेजा जाता है।HTT-40 के बेड़े का विस्तार होने और प्रशिक्षकों की तैयारी पूरी होने के बाद भारतीय वायुसेना की प्रशिक्षण व्यवस्था में इसकी भूमिका बढ़ने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम देश में सैन्य विमानन उपकरणों के स्वदेशी विकास और निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

