‘भाभी से शादी नहीं करूंगा…’, भैया की पत्नी से बनाता रहा संबंध, शादी करवा दी तो फूट-फूटकर रोने लगा लगा देवर
बिहार के आरा जिले के चरपोखरी थाना क्षेत्र के कोयल गांव में एक अनोखी और विवादित घटना सामने आई है, जहां भाभी और देवर को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े जाने के बाद पूरे गांव ने इस मामले को पंचायत में उठाया और दोनों की शादी करवा दी। इस घटना ने न केवल गांव में सनसनी मचा दी है, बल्कि सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण से भी कई सवाल खड़े किए हैं।
घटना का विवरण
कोयल गांव की रहने वाली 22 वर्षीय रानी का दिलीप कुमार नामक युवक से ढाई सालों से अफेयर चल रहा था। दिलीप 24 वर्ष का चंदा गांव का निवासी है। दिलीप और रानी के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं, जबकि रानी की शादी 27 फरवरी 2022 को दिलीप के ही मौसेरे भाई सोनू चौधरी से हुई थी। दिलीप ने इस शादी में भी भाग लिया और यहां तक कि डांस भी किया था। शादी के बाद रानी अपने ससुराल में रहने लगी, जहां दिलीप भी अपने ननिहाल डीलिया लख में रहता था।
चार महीने तक सब कुछ ठीक चलता रहा, लेकिन धीरे-धीरे दिलीप और रानी के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। जब भी सोनू घर पर नहीं होता, तब रानी दिलीप को मिलने बुलाती थी। इस संबंध का पता चलने पर सोनू ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद रानी मायके लौट आई, लेकिन दिलीप उसके पास चोरी-छिपे मिलने आता रहा।
गांव वालों की कार्रवाई और पंचायत
मामला तब और गंभीर हो गया जब दिलीप को भाभी रानी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया गया। इस बात की खबर पूरे गांव में फैल गई और गांव वालों ने बैठक बुलाई। पंचायत में यह फैसला लिया गया कि दोनों की शादी करवा दी जाए। जब इस बात की जानकारी दिलीप को हुई, तो वह फूट-फूट कर रोने लगा और शादी से इनकार किया, लेकिन गांव वालों ने उसकी बात नहीं मानी।
अंततः कोयल गांव के ही शिव मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज के साथ दोनों की शादी करवा दी गई। शादी के बाद रानी को प्रेमी दिलीप के घर विदा किया गया। पंचायत की ओर से दोनों को एक रजामंदी का पत्र भी दिया गया।
पति ने दिया अनोखा बयान
रानी के पति सोनू ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर दिलचस्प प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि रानी दिलीप से शादी करना चाहती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, वह इस रिश्ते को रोकना नहीं चाहते। सोनू ने साफ कहा, "मैं इस लड़की को नहीं रखूंगा, जहां उसे खुशी मिले, वह वहीं रहे।"
सामाजिक और कानूनी पहलू
यह मामला सामाजिक परंपराओं, परिवारिक मूल्यों और कानूनी दायरे में कई विवादों को जन्म देता है। जहां एक तरफ गांव वालों ने पंचायत लगाकर इस मुद्दे को हल करने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर यह सवाल उठता है कि क्या यह विवाह कानूनन मान्य होगा या नहीं। साथ ही, इसमें शामिल लोगों के अधिकार और इच्छाओं का भी सम्मान होना जरूरी है।
निष्कर्ष
आरा जिले के कोयल गांव की यह घटना पारंपरिक सोच और आधुनिक कानूनी व्यवस्थाओं के बीच एक टकराव को दर्शाती है। देवर और भाभी के इस विवादित संबंध पर गांव की पंचायत ने अपना फैसला सुनाया, जिसने दोनों की शादी कराकर मामला खत्म कर दिया। यह घटना सामाजिक चेतना और व्यक्तिगत अधिकारों की समझ को बढ़ाने का अवसर भी है। आगे देखना होगा कि इस मामले में न्याय व्यवस्था क्या फैसला देती है और इस तरह के मामलों को रोकने या सुलझाने के लिए समाज और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।

