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प्यार का प्रपोजल ठुकराना पड़ा भारी! मन में पल रही थी खतरनाक चाहत, बदला लेने के लिए दिनदहाड़े बरसाई गोलियां, फिर खुद के साथ भी किया...

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हरियाणा के झज्जर जिले के बादली गांव में हुई फायरिंग की घटना के बाद फरार चल रहे अपराधी हरीश उर्फ मोनू की गिरफ्तारी एक फिल्मी सीन से कम नहीं थी। दिल्ली के द्वारका इलाके में नाकाबंदी के दौरान जब पुलिस ने उसे पकड़ा, तो उसके पास से अत्याधुनिक पिस्टल, चार जिंदा कारतूस और एक काली थार कार बरामद हुई – वही कार जो अपराध में इस्तेमाल की गई थी।

17 अप्रैल को मिली थी मुखबिरी

हेड कांस्टेबल कुलवंत सिंह को 17 अप्रैल को सूचना मिली कि झज्जर फायरिंग केस का वांछित आरोपी हरीश उर्फ मोनू दिल्ली की ओर उसी गाड़ी में आ रहा है जिसमें वारदात को अंजाम दिया गया था। फौरन द्वारका पुलिस एक्टिव हुई और इलाके में कड़ी नाकाबंदी कर दी गई। जैसे ही वह आरोपी द्वारका के ककरोला गंदा नाला के पास पहुंचा, पुलिस ने उसे धर दबोचा।

कौन है हरीश उर्फ मोनू?

27 वर्षीय हरीश झज्जर जिले के बादली गांव का रहने वाला है और अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बनाना चाहता था। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह लोगों को डराने और अपना खौफ जमाने के लिए हथियारों से लैस होकर घूमता था और खुलेआम फायरिंग करता था। उसके खिलाफ पहले से कई आपराधिक केस दर्ज हैं। पुलिस ने उसे आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया है।

बड़ी वारदात से पहले हुई गिरफ्तारी

पुलिस का मानना है कि यदि समय रहते उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता, तो वह द्वारका और उसके आसपास किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकता था। उसकी गिरफ्तारी से दिल्ली पुलिस ने एक गंभीर अपराध को समय रहते रोक लिया।

निष्कर्ष

इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पुलिस की सतर्कता और मुखबिरों का नेटवर्क अपराधियों के मंसूबों पर भारी पड़ता है। हरीश उर्फ मोनू की गिरफ्तारी सिर्फ एक केस की कामयाबी नहीं, बल्कि दिल्ली में कानून व्यवस्था को चुनौती देने की एक साजिश का समय रहते जवाब है।

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