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हैदराबाद के डॉक्टर पी. रघु राम ने एआई होलोग्राम लेक्चर से बनाया नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। स्वास्थ्य सेवा और आधुनिक तकनीक के मेल में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। हैदराबाद के ब्रेस्ट डिजीज स्पेशलिस्ट डॉक्टर पी रघुराम ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित इंटरैक्टिव होलोग्राम स्वास्थ्य जागरूकता व्याख्यान के जरिए दुनिया का सबसे बड़ा ऑडियंस रिकॉर्ड बनाकर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया है।
हैदराबाद के डॉक्टर पी. रघु राम ने एआई होलोग्राम लेक्चर से बनाया नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। स्वास्थ्य सेवा और आधुनिक तकनीक के मेल में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। हैदराबाद के ब्रेस्ट डिजीज स्पेशलिस्ट डॉक्टर पी रघुराम ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित इंटरैक्टिव होलोग्राम स्वास्थ्य जागरूकता व्याख्यान के जरिए दुनिया का सबसे बड़ा ऑडियंस रिकॉर्ड बनाकर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया है।

यह उपलब्धि उनके लिए पिछले 15 महीनों में तीसरा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड है, जो जन स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ उपलब्धि मानी जा रही है। यह कार्यक्रम सिकंदराबाद स्थित केआईएमएस हॉस्पिटल में आयोजित किया गया था, जिसमें एआई तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया।

डॉ. रघु राम ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने बताया कि एआई आधारित होलोग्राफिक ब्रेस्ट हेल्थ एजुकेशन के माध्यम से उन्होंने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। इस पहल को उषा लक्ष्मी ब्रेस्ट कैंसर फाउंडेशन और केआईएमएस-उषालक्ष्मी सेंटर फॉर ब्रेस्ट डिजीज के सहयोग से आगे बढ़ाया गया है।

इस अवसर पर उन्होंने देशभर में ब्रेस्ट हेल्थ जागरूकता बढ़ाने के लिए एक नई पहल की भी शुरुआत की, जिसका नाम एनएआरआई (नेशनल अवेयरनेस एंड रिसोर्स इंटियाटिव फॉर ब्रेस्ट हेल्थ) रखा गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं में स्तन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समय पर जांच को प्रोत्साहित करना है।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. रघु राम ने आम लोगों को ब्रेस्ट स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि फाइब्रोएडेनोमा स्तन में होने वाली एक सामान्य और कैंसर-रहित गांठ है, जो अधिकतर युवा महिलाओं में पाई जाती है। यह आमतौर पर दर्द रहित होती है और आसानी से हिलने वाली महसूस होती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश मामलों में फाइब्रोएडेनोमा के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं होती। केवल नियमित जांच और निगरानी से इसका प्रबंधन किया जा सकता है। हालांकि, बड़े या जटिल मामलों में डॉक्टर इलाज या सर्जरी की सलाह दे सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा को नए स्तर पर पहुंचाने का यह प्रयास भारत में मेडिकल जागरूकता के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। यह पहल खासकर महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति समझ और समय पर जांच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

--आईएएनएस

एमटी/डीकेपी

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