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यूक्रेन और मिडल ईस्ट की जंग का आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर? एस. जयशंकर ने विस्तार से समझाया सब  

यूक्रेन और मिडल ईस्ट की जंग का आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर? एस. जयशंकर ने विस्तार से समझाया सब  

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए सामूहिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में, कोई भी संकट या संघर्ष अपनी भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहता; बल्कि, इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर दूरगामी और अप्रत्याशित प्रभाव पड़ता है। नतीजतन, भारत और यूरोपीय संघ जैसी लोकतांत्रिक और आर्थिक महाशक्तियों को साझा चुनौतियों से निपटने के लिए अपने सहयोग को नए स्तरों तक ले जाना चाहिए।

**आर्थिक परस्पर निर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) से जुड़े जोखिम**

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा दौर में, वैश्विक अर्थव्यवस्था के सुचारू कामकाज के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं का लचीलापन (resilience) महत्वपूर्ण है। दुनिया इस समय कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, तकनीक और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ी विभिन्न संरचनात्मक और प्रणालीगत चुनौतियों का सामना कर रही है।
• **एकतरफा निर्भरता का खतरा:** उन्होंने चेतावनी दी कि सीमित संसाधनों - या उत्पादन के किसी एक स्रोत - पर अत्यधिक निर्भरता दुनिया के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर सकती है।
• **वैकल्पिक स्रोतों का विकास:** संकट के समय अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अफरा-तफरी को रोकने के लिए नए और विश्वसनीय वैश्विक आपूर्ति विकल्प तैयार करना समय की मांग है।
• **जोखिम कम करना:** भारत और उसके वैश्विक साझेदारों को आर्थिक जोखिमों को कम करने और तकनीक तथा लॉजिस्टिक्स के क्षेत्रों में एकाधिकार को रोकने के लिए ठोस नीतियां बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

**वैश्विक संघर्षों का पूरी दुनिया पर सीधा असर पड़ता है**

भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए, डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में, कोई भी युद्ध या सैन्य संघर्ष स्थानीय नहीं रह जाता है। यूक्रेन युद्ध और खाड़ी, अफ्रीका तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्रों में बढ़ते तनावों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि इन संकटों का वैश्विक व्यापार, ईंधन की कीमतों और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता है।

दुनिया के एक कोने में हुआ संघर्ष दूसरे कोने में लोगों के जीवन को बदल सकता है। अक्सर, इन संकटों का असर ऐसे अप्रत्याशित तरीकों से सामने आता है जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इसलिए, संकट के इस दौर में, देशों के बीच गहरा राजनीतिक सहयोग और रणनीतिक समन्वय केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता बन गया है।

सहयोग और समन्वय ही आगे बढ़ने का रास्ता है

विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि चुनौतीपूर्ण समय में, भारत और यूरोपीय संघ जैसे करीबी और भरोसेमंद साझेदारों के बीच रणनीतिक सहयोग न केवल दोनों पक्षों के आपसी हित में है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता के लिए एक मजबूत स्तंभ भी साबित होगा। जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करके ही दुनिया के लिए एक सुरक्षित और स्थिर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है। वैश्विक जोखिमों को कम करने का एकमात्र तरीका बहुपक्षीय बातचीत और मजबूत आर्थिक साझेदारी है।

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