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AI से कितनी नौकरियां जाएंगी? 5% वाले दावे पर क्यों छिड़ी बहस, क्या सच में इंसानों की जगह लेगा AI?

AI से कितनी नौकरियां जाएंगी? 5% वाले दावे पर क्यों छिड़ी बहस, क्या सच में इंसानों की जगह लेगा AI?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर दुनिया इस समय दो अलग-अलग राय में बंटी हुई है। एक तरफ बड़ी AI कंपनियां और टेक इंडस्ट्री के कई दिग्गज मानते हैं कि आने वाले कुछ वर्षों में AI बड़ी संख्या में व्हाइट-कॉलर नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। वहीं नोबेल विजेता अर्थशास्त्री डैरोन एसमोग्लू का अनुमान इससे काफी अलग है।

एसमोग्लू का कहना है कि अगले 10 साल में AI अमेरिका के सिर्फ करीब 5 फीसदी कामों को ही आर्थिक रूप से अपने हाथ में ले पाएगा। माइक्रोसॉफ्ट AI के CEO मुस्तफा सुलेमान ने सोशल मीडिया पर एसमोग्लू के इस अनुमान को शेयर किया, जिसके बाद AI और नौकरियों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।लेकिन सवाल यह है कि आखिर एसमोग्लू का 5 फीसदी वाला अनुमान कितना सही है और इसके पीछे पूरा गणित क्या है?

एसमोग्लू के 5% अनुमान का गणित क्या है?

एसमोग्लू ने अपने रिसर्च पेपर 'द सिंपल मैक्रोइकॉनॉमिक्स ऑफ AI' में बताया है कि किसी भी नई तकनीक का आर्थिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि वह कितने कामों को प्रभावित करती है और उन कामों में कंपनियों की कितनी लागत बचती है।

उनके अनुमान को कुछ अहम बिंदुओं से समझा जा सकता है।

1. सिर्फ 5% काम पूरी तरह AI के हवाले होंगे

एसमोग्लू के मुताबिक अमेरिकी लेबर मार्केट में करीब 20 फीसदी ऐसे काम हैं, जिन्हें AI तकनीकी रूप से संभाल सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी कामों को AI इंसानों की जगह कर देगा।उनका अनुमान है कि इनमें से सिर्फ करीब एक-चौथाई यानी 5 फीसदी काम ही अगले 10 साल में आर्थिक रूप से फायदे के साथ AI को सौंपे जा सकेंगे।

इनमें डेटा समरी, विजुअल मैचिंग और पैटर्न रिकग्निशन जैसे काम शामिल हो सकते हैं। उनका मानना है कि पत्रकार, वित्तीय विशेषज्ञ और HR जैसे कई पेशों में इंसानों की भूमिका बनी रहेगी।

2. GDP पर भी सीमित असर

एसमोग्लू का अनुमान है कि अगले 10 साल में AI अमेरिकी GDP में करीब 1.1 से 1.6 फीसदी की अतिरिक्त वृद्धि कर सकता है।

यह अनुमान उन दावों की तुलना में काफी कम है, जिनमें AI को अमेरिकी आर्थिक विकास की रफ्तार को काफी बढ़ाने वाला बताया गया है।

3. AI को अपनाने में लगेगा समय

एसमोग्लू ने AI की तुलना बिजली के शुरुआती दौर से की है। उनका तर्क है कि किसी नई तकनीक का आविष्कार हो जाना और उसका पूरी अर्थव्यवस्था में इस्तेमाल शुरू हो जाना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

1881 तक न्यूयॉर्क और लंदन में पावर स्टेशन बन चुके थे, लेकिन इसके बावजूद बिजली को बड़े पैमाने पर घरों और फैक्ट्रियों तक पहुंचने में कई दशक लगे।

उनका मानना है कि AI को अपनाने में भी समय लगेगा, क्योंकि कंपनियों को अपने काम करने के तरीके और पूरे ऑपरेशन में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।

4. 99% सटीकता भी पूरी ऑटोमेशन के लिए पर्याप्त नहीं

AI को लेकर एक अहम सवाल उसकी सटीकता का है। एसमोग्लू का तर्क है कि अगर किसी AI सिस्टम की सटीकता 99 फीसदी भी हो, तब भी पूरी तरह इंसानों को हटाना आसान नहीं होगा।

क्योंकि बचा हुआ 1 फीसदी काम कई बार सबसे जटिल और महत्वपूर्ण होता है। इसी वजह से इंसानी निगरानी की जरूरत बनी रह सकती है।

मुस्तफा सुलेमान ने भी इसी तर्क को दोहराया है कि 99 फीसदी सटीकता हासिल कर लेना पूरी तरह ऑटोमेशन के लिए पर्याप्त नहीं है।

सुलेमान और दूसरे टेक एक्सपर्ट क्यों असहमत हैं?

AI को लेकर एसमोग्लू के अनुमान को काफी सतर्क माना जा रहा है। कई टेक एक्सपर्ट्स और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि AI का असर इससे कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है।

माइक्रोसॉफ्ट AI के CEO मुस्तफा सुलेमान ने मई 2026 में दावा किया था कि AI अगले 12 से 18 महीनों में कई पेशेवर कामों में इंसानों के बराबर पहुंच सकता है। उन्होंने अकाउंटिंग, लीगल और मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों को भी AI से प्रभावित होने वाले सेक्टरों में गिना था।

हालांकि अक्टूबर 2026 में उन्होंने एसमोग्लू के 5 फीसदी वाले अनुमान को सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिससे इस बहस को और हवा मिल गई।

वेंचर कैपिटलिस्ट बिल गुर्ले ने भी AI को लेकर किए जा रहे बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों से सावधान रहने की बात कही है। उनका मानना है कि AI को लेकर जरूरत से ज्यादा डर और जरूरत से ज्यादा उम्मीद, दोनों ही स्थिति सही तस्वीर नहीं दिखातीं।

AI से नई नौकरियां भी बन रही हैं

AI का दूसरा पहलू यह है कि जहां कुछ नौकरियों पर खतरा बढ़ रहा है, वहीं नई नौकरियां भी पैदा हो रही हैं।

WEF के मुताबिक लिंक्डइन के डेटा में AI की वजह से दुनियाभर में करीब 13 लाख नई नौकरियां बनने की बात सामने आई है। इनमें 6 लाख से ज्यादा नौकरियां AI-enabled डेटा सेंटर से जुड़ी हैं।

AI से जुड़ी स्किल वाली नौकरियों में भी तेजी देखी गई है। वहीं दूसरी तरफ पारंपरिक नौकरी बाजार की ग्रोथ अपेक्षाकृत धीमी रही है।

इससे संकेत मिलता है कि AI सिर्फ नौकरियां खत्म करने वाली तकनीक नहीं है, बल्कि नौकरी के स्वरूप को बदलने वाली तकनीक भी हो सकती है।

जूनियर कर्मचारियों पर ज्यादा दबाव?

AI का असर सभी कर्मचारियों पर एक जैसा नहीं दिखाई दे रहा है। कई कंपनियों में शुरुआती स्तर के ऐसे काम तेजी से ऑटोमेट किए जा रहे हैं, जिनमें डेटा प्रोसेसिंग, कस्टमर सपोर्ट, रिपोर्ट तैयार करना या सामान्य कंटेंट तैयार करना शामिल है।

ऐसे में जूनियर कर्मचारियों के लिए एंट्री-लेवल अवसरों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं अनुभवी कर्मचारियों की भूमिका कई जगह AI को नियंत्रित करने, परिणामों की जांच करने और जटिल निर्णय लेने में बनी रह सकती है।

यानी आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि AI कितनी नौकरियां खत्म करेगा, बल्कि यह भी होगा कि AI के साथ काम करने वाले इंसानों की जरूरत कितनी बढ़ेगी।

कंपनियां AI अपना तो रही हैं, लेकिन रफ्तार अभी सीमित

PwC के 2026 के सर्वे के मुताबिक करीब 64 फीसदी कर्मचारियों ने पिछले 12 महीनों में जेनरेटिव AI का इस्तेमाल किया। हालांकि AI एजेंट को रोजाना इस्तेमाल करने वाले कर्मचारियों की संख्या अभी काफी कम है।

इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है—कंपनियों और कर्मचारियों के बीच AI का इस्तेमाल बढ़ जरूर रहा है, लेकिन पूरी तरह ऑटोमेशन अभी दूर है।

यानी AI की क्षमता और कंपनियों में उसके वास्तविक इस्तेमाल के बीच अभी काफी अंतर मौजूद है।

तो क्या एसमोग्लू का 5% दावा सही है?

इस सवाल का सीधा जवाब देना मुश्किल है।

एसमोग्लू का 5 फीसदी अनुमान AI के मौजूदा आर्थिक प्रभाव और उन कामों पर आधारित है, जहां ऑटोमेशन वास्तव में कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसलिए इसे AI से प्रभावित होने वाली कुल नौकरियों का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

खास बात यह है कि एसमोग्लू खुद भी अपने पुराने अनुमान को लेकर पूरी तरह निश्चित नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि अगर एजेंटिक AI यानी ऐसे AI सिस्टम को गणना में शामिल किया जाए जो खुद से कई टास्क पूरे कर सकते हैं, तो 5 फीसदी वाले अनुमान पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।

यानी AI की तेजी से बदलती तकनीक के कारण आज का अनुमान आने वाले कुछ वर्षों में बदल सकता है।

AI इंसानों की जगह लेगा या इंसानों का काम आसान करेगा?

असल तस्वीर शायद इन दोनों के बीच कहीं है।AI कुछ दोहराए जाने वाले और आसानी से ऑटोमेट होने वाले कामों को इंसानों से ले सकता है। वहीं कई क्षेत्रों में यह इंसानों की उत्पादकता बढ़ाने वाला टूल भी बन सकता है।एसमोग्लू का जोर भी इसी बात पर है कि AI को इंसानों को पूरी तरह हटाने के बजाय उनके काम को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

इसे एक कैलकुलेटर के उदाहरण से समझा जा सकता है। कैलकुलेटर ने गणितज्ञों की जरूरत खत्म नहीं की, बल्कि उनके काम को तेज और आसान बनाया।इसलिए आने वाले समय में सबसे बड़ा बदलाव शायद यह नहीं होगा कि AI इंसानों की सारी नौकरियां छीन लेगा, बल्कि यह होगा कि AI के साथ काम करना जानने वाले कर्मचारी उन लोगों से आगे निकल सकते हैं जो AI का इस्तेमाल नहीं करते।

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