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पाइप से सीधे किचन तक कैसे पहुंचती है PNG गैस? जानिए स्मार्ट किचन सिस्टम की पूरी कहानी

PNG

भारत में तेजी से बढ़ती पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) व्यवस्था अब रसोई को स्मार्ट और सुविधाजनक बना रही है। एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है और उसकी जगह PNG ले रही है, जो सीधे पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचती है। यह न केवल सुविधाजनक है, बल्कि सुरक्षित और पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर मानी जाती है।

PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस, मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है, जिसे जमीन के अंदर से निकाला जाता है और प्रोसेस करने के बाद पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है।

इस सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं होती। जैसे पानी की सप्लाई पाइप के जरिए आती है, उसी तरह गैस भी सीधे किचन तक पहुंचती है। इससे गैस खत्म होने या सिलेंडर बुक करने की चिंता खत्म हो जाती है और 24x7 गैस सप्लाई मिलती रहती है।

PNG के काम करने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है। सबसे पहले प्राकृतिक गैस को गैस फील्ड या इंपोर्ट टर्मिनल से निकाला जाता है। इसके बाद इसे हाई-प्रेशर पाइपलाइनों के जरिए शहरों तक पहुंचाया जाता है। शहरों में बने “सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन” (CGD) नेटवर्क के जरिए गैस का दबाव कम किया जाता है ताकि इसे सुरक्षित तरीके से घरों तक भेजा जा सके।

इसके बाद गैस आपके घर तक एक मीटर के जरिए पहुंचती है, जो आपकी खपत को मापता है। यानी जितनी गैस आप इस्तेमाल करते हैं, आपको उतना ही बिल देना होता है। यह सिस्टम बिजली और पानी की तरह काम करता है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ती हैं।

सुरक्षा के लिहाज से भी PNG को बेहतर माना जाता है। यह गैस हवा से हल्की होती है, इसलिए लीक होने पर जल्दी फैल जाती है और जमा नहीं होती, जबकि LPG भारी होती है और नीचे जमा होकर खतरा बढ़ा सकती है।

इसके अलावा PNG लो-प्रेशर पर सप्लाई होती है, जिससे दुर्घटना की संभावना काफी कम हो जाती है। घरों में गैस स्टोर करने की जरूरत नहीं होती, जिससे विस्फोट का खतरा भी कम होता है।

खर्च के मामले में भी PNG कई मामलों में LPG से सस्ती साबित होती है। साथ ही इसमें बार-बार सिलेंडर मंगाने या उठाने की झंझट खत्म हो जाती है, जिससे यह खासकर बुजुर्गों और शहरी परिवारों के लिए ज्यादा सुविधाजनक विकल्प बन रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में PNG का विस्तार तेजी से होगा और यह भारत के किचन सिस्टम को पूरी तरह बदल सकता है। यह न केवल स्मार्ट किचन की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा की ओर भी एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

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