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माइनस 60 डिग्री की ठंड में कैसे जीते हैं लोग? अलास्का की महिला ने बताया सर्दियों का खौफनाक अनुभव

माइनस 60 डिग्री की ठंड में कैसे जीते हैं लोग? अलास्का की महिला ने बताया सर्दियों का खौफनाक अनुभव

दिल्ली में सर्दियों के दौरान जब तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंचता है, तो लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ऐसे में घर से बाहर निकलना भी चुनौतीपूर्ण लगने लगता है। लेकिन जरा सोचिए, अगर तापमान माइनस 60 डिग्री फारेनहाइट तक गिर जाए, तो वहां रहने वाले लोगों की जिंदगी कैसी होगी? अमेरिका का अलास्का राज्य अपनी भीषण ठंड के लिए जाना जाता है। यहां के कुछ इलाकों में सर्दियों के दौरान तापमान बेहद निचले स्तर तक पहुंच जाता है। ऐसे ही हालात में रहने वाली एक महिला ने बताया है कि कड़ाके की ठंड का सामना करने के लिए उन्हें किस तरह की तैयारियां करनी पड़ती हैं और इस पर कितना खर्च आता है।

माइनस 60 डिग्री तक पहुंच जाता है तापमान

अमेरिका के अलास्का राज्य के फेयरबैंक्स में रहने वाली 25 वर्षीय जूली कैपल्स पब्लिक रिलेशंस के क्षेत्र में काम करती हैं। उन्होंने बताया कि पिछली सर्दियों में उनके इलाके का तापमान माइनस 60 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया था। इतनी भीषण ठंड में सामान्य जिंदगी जीना आसान नहीं होता। लोगों को घर गर्म रखने से लेकर अपनी गाड़ियों को सुरक्षित रखने तक कई तरह की तैयारियां करनी पड़ती हैं।

पीपल (PEOPLE) की रिपोर्ट के मुताबिक, जूली ने बताया कि अलास्का के अंदरूनी इलाकों में सर्दियों की तैयारी करना काफी महंगा साबित हो सकता है। उन्होंने और उनके पति ट्रेंट ने सर्दियों की बुनियादी जरूरतों पर करीब 2,000 डॉलर खर्च किए। इस रकम में हीटिंग ऑयल और दोनों गाड़ियों के लिए विंटर टायर जैसी जरूरी चीजें शामिल थीं।

जूली ने अपने टिकटॉक वीडियो में भी दिखाया कि वह और उनके पति कड़ाके की ठंड से निपटने के लिए किस तरह पहले से तैयारी करते हैं।

ठंड से टूट गया घर का पिछला दरवाजा

अलास्का की सर्दियां कितनी मुश्किल हो सकती हैं, इसका अंदाजा जूली के एक अनुभव से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पिछली सर्दियों में तापमान कई हफ्तों तक माइनस 40 डिग्री के आसपास बना रहा और एक समय माइनस 60 डिग्री तक पहुंच गया।

एक सुबह जब वह सोकर उठीं, तो उन्होंने देखा कि उनके घर का पिछला दरवाजा टूटकर खुल गया था। भीषण ठंड के कारण दरवाजे के आसपास का हिस्सा पाले और बर्फ से ढक गया था। इस घटना ने उन्हें एहसास कराया कि इतनी ठंड में सिर्फ हीटर के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं है। घर के दरवाजों, खिड़कियों, पाइप और हीटिंग सिस्टम की लगातार निगरानी करना भी बेहद जरूरी है।

लकड़ी खुद तैयार करके बचाए पैसे

भीषण ठंड में घर को गर्म रखने के लिए हीटिंग ऑयल और जलाऊ लकड़ी की जरूरत पड़ती है। जूली और उनके पति ने लकड़ी खरीदने पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए खुद मेहनत करने का फैसला किया।

उन्होंने अपने वुड स्टोव के लिए लकड़ियां खुद काटीं, उन्हें छोटे टुकड़ों में बांटा और सर्दियों के लिए जमा किया। जूली के मुताबिक, डिलीवरी के जरिए लकड़ी खरीदने पर एक कॉर्ड की कीमत करीब 400 से 600 डॉलर तक हो सकती है। ऐसे में खुद लकड़ी तैयार करने से उन्हें काफी बचत करने में मदद मिली।

गाड़ी से लेकर घर तक, हर चीज की करनी पड़ती है तैयारी

फेयरबैंक्स में सर्दियों के दौरान सिर्फ गर्म कपड़े पहनना ही काफी नहीं होता। यहां लोगों को घर और गाड़ियों की सुरक्षा के लिए भी खास इंतजाम करने पड़ते हैं।

जूली बताती हैं कि सर्दियों में उन्हें कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है। इनमें हीटिंग ऑयल का पर्याप्त स्टॉक रखना, पाइप और खिड़कियों की जांच करना, दरवाजों को सुरक्षित रखना और हीटिंग सिस्टम को सही हालत में बनाए रखना शामिल है। इसके साथ ही वुड स्टोव के लिए पर्याप्त लकड़ी जमा रखना भी जरूरी होता है।

गाड़ियों को भी अत्यधिक ठंड से बचाने के लिए खास इंतजाम किए जाते हैं। लोग जरूरत के मुताबिक इंजन को गर्म रखने के लिए गाड़ियों को प्लग-इन करते हैं और विंटर टायर का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, घर से बाहर निकलते समय कई परतों वाले गर्म कपड़े पहनना आम दिनचर्या का हिस्सा है।

इतना ही नहीं, बर्फबारी के दौरान घर और आसपास के रास्तों से बर्फ हटाने के लिए भी समय निकालना पड़ता है। किराने का सामान खरीदने जैसे सामान्य कामों के लिए भी पहले से योजना बनानी पड़ती है।

अलास्का में सर्दियां सिर्फ मौसम नहीं, बड़ी चुनौती हैं

जूली कैपल्स का अनुभव बताता है कि अलास्का के बेहद ठंडे इलाकों में सर्दियों का सामना करना केवल गर्म कपड़े पहनने तक सीमित नहीं है। इसके लिए घर, गाड़ी, ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों की पहले से तैयारी करनी पड़ती है। तापमान जितना नीचे जाता है, मुश्किलें और खर्च उतने ही बढ़ सकते हैं।जहां दिल्ली में 5 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान लोगों को परेशान कर देता है, वहीं अलास्का के कुछ इलाकों में रहने वाले लोग माइनस 40 से माइनस 60 डिग्री फारेनहाइट जैसी परिस्थितियों में जीवन बिताने के लिए पूरी तैयारी करते हैं।

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