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होर्मुज की जिम्मेदारी सेना को सौंप सकता है ईरान: राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग प्रमुख अजीजी

तेहरान/वाशिंगटन, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान अड़ा है तो अमेरिकी नाकेबंदी ने हालात उसके लिए और पेचीदा कर दिए हैं। इस सबके बीच ईरान की ओर से कहा जा रहा है कि दुनिया के इस प्रमुख जलडमरूमध्य की जिम्मेदारी अब सेना को सौंपी जा सकती है वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है वो किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है।
होर्मुज की जिम्मेदारी सेना को सौंप सकता है ईरान: राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग प्रमुख अजीजी

तेहरान/वाशिंगटन, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान अड़ा है तो अमेरिकी नाकेबंदी ने हालात उसके लिए और पेचीदा कर दिए हैं। इस सबके बीच ईरान की ओर से कहा जा रहा है कि दुनिया के इस प्रमुख जलडमरूमध्य की जिम्मेदारी अब सेना को सौंपी जा सकती है वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है वो किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है।

सरकारी टीवी पर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा, "ईरान दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग की जिम्मेदारी सेना को सौंप सकता है और इसके लिए नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है।"

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत होर्मुज स्ट्रेट का प्रबंधन सेना के पास होगा। अल जजीरा ने सरकारी टेलीविजन के हवाले से बताया कि अजीजी ने कहा कि प्रस्तावित कानून में प्रावधान होगा कि इस मार्ग से होने वाली कमाई ईरानी रियाल में होगी।

अजीजी की मानें तो ईरानी सेना पहले से इस जलमार्ग पर नियंत्रण रखती रही है और इसकी सुरक्षा व्यवस्था संभाल रही है। अब तैयारी "दुश्मन जहाजों" की आवाजाही रोकने की भी है।

इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर एक पोस्ट किया है। एक तस्वीर के साथ लिखा है कि वर्तमान समय में चूंकि शांति वार्ता एकदम रुकी हुई है, इसलिए सेंटकॉम मिडिल ईस्ट पर पूरी तरह से केंद्रित है।

रविवार को ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि उनके दूत अब इस्लामाबाद टॉक्स के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन इसका ये मतलब कतई नहीं है कि बातचीत नहीं होगी। ईरान चाहे तो पहल कर सकता है।

बता दें, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल है। खाड़ी देशों से निकलने वाले बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया भर में भेजा जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि ऐसे हालात जारी रहे तो एशिया से लेकर यूरोप, अमेरिका, समेत पूरी दुनिया गंभीर ऊर्जा संकट में फंस जाएगी। तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होने से कोई रोक नहीं पाएगा।

--आईएएनएस

केआर/

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