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होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बाद तेल बाजार को उबरने में लगेंगे महीनों: रूस

मास्को, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अवरोध के बाद वैश्विक तेल बाजार को सामान्य स्थिति में लौटने में कई महीने लग सकते हैं, भले ही इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोल दिया जाए।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बाद तेल बाजार को उबरने में लगेंगे महीनों: रूस

मास्को, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अवरोध के बाद वैश्विक तेल बाजार को सामान्य स्थिति में लौटने में कई महीने लग सकते हैं, भले ही इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोल दिया जाए।

रूसी प्रसारण कंपनी वीजीटीआरके को दिए साक्षात्कार में नोवाक ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी संकट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे बाजार में बड़ी कमी पैदा हो गई है।

उन्होंने कहा, “संकट बेहद गहरा है—इस दौरान बड़ी मात्रा में तेल बाजार तक नहीं पहुंच पाया और बड़ी संख्या में जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे हुए हैं।”

नोवाक के अनुसार, इस स्थिति के कारण आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बहाल करने में समय लगेगा। उन्होंने कहा, “बाजार को फिर से संतुलित होने और पुराने स्तर पर लौटने में निश्चित रूप से कुछ समय लगेगा, और हमारे आकलन में यह अवधि कई महीनों की हो सकती है।”

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने फोन पर बातचीत की है। ब्रिटिश पीएमओ के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। बयान में बताया गया कि इस दौरान दोनों नेताओं ने जहाजों की आवाजाही जल्द बहाल करने पर जोर दिया और माना कि अगर होर्मुज में शिपिंग प्रभावित रहती है तो इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ेगा।

स्टार्मर ने ट्रंप को बताया कि वह फ्रांस के साथ मिलकर समुद्री रास्तों को फिर से सुरक्षित रूप से चालू करने के प्रयास कर रहे हैं।

बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है। अमेरिकी नाकेबंदी और ईरान के इस स्ट्रेट को न खोलने के निर्णय से स्थिति पेचीदा है। इसमें व्यवधान की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार और कीमतों पर व्यापक असर भी पड़ा है।

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते तेल आपूर्ति शृंखला पर दबाव बना हुआ है, जिससे आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

--आईएएनएस

केआर/

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