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महंगा हुआ होम लोन! RBI का रेपो रेट 0.25% बढ़ा, जेब पर पड़ेगा सीधा असर; समझें EMI का पूरा गणित

महंगा हुआ होम लोन! RBI का रेपो रेट 0.25% बढ़ा, जेब पर पड़ेगा सीधा असर; समझें EMI का पूरा गणित

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी का फैसला किया है। इस फैसले के बाद कर्ज की लागत बढ़ सकती है और खासतौर पर फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI पर इसका असर पड़ सकता है।RBI का यह कदम महंगाई के दबाव और घरेलू-वैश्विक आर्थिक जोखिमों को देखते हुए सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की दिशा में संकेत माना जा रहा है। हालांकि, रेपो रेट बढ़ने के तुरंत बाद हर बैंक अपनी ब्याज दर नहीं बढ़ाता। इसका असर बैंक की रीसेट साइकिल और ब्याज दरों में ट्रांसमिशन की गति पर निर्भर करेगा।

50 लाख के होम लोन पर करीब ₹780 ज्यादा EMI

अगर किसी व्यक्ति ने 50 लाख रुपये का होम लोन 20 साल की अवधि के लिए लिया है और ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी होती है, तो उसकी मासिक EMI में करीब ₹780 तक की बढ़ोतरी हो सकती है।अगर ग्राहक लोन की अवधि में कोई बदलाव नहीं करता है, तो पूरी लोन अवधि के दौरान उसके कुल ब्याज खर्च में करीब ₹1.88 लाख तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है।हालांकि, वास्तविक असर आपके मौजूदा ब्याज दर, बैंक की रीसेट पॉलिसी और लोन के बचे हुए कार्यकाल पर निर्भर करेगा।

फ्लोटिंग रेट वाले ग्राहकों पर ज्यादा असर

रेपो रेट में बढ़ोतरी का सबसे सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जिनका होम लोन फ्लोटिंग रेट और किसी बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा हुआ है।जब बैंक का लोन ऊंची ब्याज दर पर रीसेट होगा, तो ग्राहक के सामने दो विकल्प हो सकते हैं—EMI बढ़ाना या लोन की अवधि बढ़ाना।अगर बैंक EMI को लगभग समान रखते हुए लोन की अवधि बढ़ाता है, तो हर महीने जेब पर तुरंत ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा। लेकिन लंबे समय तक ब्याज चुकाने के कारण कुल ब्याज खर्च बढ़ सकता है।

फिक्स्ड रेट होम लोन वालों पर तुरंत असर नहीं

जिन लोगों ने फिक्स्ड रेट पर होम लोन लिया है, उनकी मौजूदा EMI पर रेपो रेट बढ़ने का तत्काल असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, नए लोन लेने वालों या भविष्य में अपने लोन को रीफाइनेंस कराने वाले ग्राहकों के लिए ब्याज लागत बढ़ सकती है।

लोन लेने वालों के पास क्या विकल्प हैं?

ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में ग्राहक अपने बैंक से लोन की नई दर और EMI का असर जरूर समझें। ज्यादा ब्याज के बोझ को कम करने के लिए आंशिक प्री-पेमेंट, दूसरे लेंडर के पास कम ब्याज दर पर लोन ट्रांसफर करना या लोन की अवधि को दोबारा तय करना जैसे विकल्प देखे जा सकते हैं।आखिर में सबसे अहम बात यह होगी कि बैंक RBI की रेपो रेट बढ़ोतरी का कितना और कितनी जल्दी असर ग्राहकों पर डालते हैं। साथ ही, आने वाली MPC बैठकों में RBI का रुख भी होम लोन की ब्याज दरों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

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