होलिका दहन आज सूर्यास्त के बाद, वीडियो में जाने शाम 6 बजे से आधी रात तक रहेगा मुहूर्त
भारतभर में आज होलिका दहन का महत्त्वपूर्ण पर्व मनाया जाएगा। पंचांग और परंपराओं के अनुसार, यह उत्सव सूर्यास्त के बाद प्रारंभ होगा और आधी रात तक चलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, होली जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजे से लेकर रात 12 बजे तक रहेगा। इस दौरान किसी भी प्रकार का भद्रा काल नहीं रहेगा, इसलिए यह समय होली जलाने के लिए बेहद शुभ माना गया है।
होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। लोग अपने घरों और बस्तियों में होली जलाकर अतीत की नकारात्मकताओं को समाप्त करने और नए सिरे से जीवन की शुरुआत करने की कामना करते हैं। परंपरा के अनुसार, प्रदोष काल में, यानी शाम को सूरज डूबते ही होली की पूजा की जाती है और उसके बाद होली का अग्निकुंड जलाया जाता है।
होली केवल रंग और मस्ती का त्योहार नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ जुड़ी हुई हैं। इस बार पांच प्रमुख मान्यताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
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वसंतोत्सव – ऋतु बदलने का उत्सव: होली वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इसे प्रकृति में नई ऊर्जा और जीवन के उजास का पर्व माना जाता है। इस दिन लोग पुराने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे के साथ प्रेम और सौहार्द का व्यवहार करते हैं।
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दोलयात्रा – राधा-कृष्ण को झूले पर विराजित करना: होली के अवसर पर राधा और कृष्ण की झूले पर विराजना परंपरा का हिस्सा है। इसे भक्तिभाव और प्रेम की प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
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राधा-कृष्ण फाग – प्रेम, रंग और लीला की होली: होली का त्योहार भगवान कृष्ण और राधा की होली से जुड़ा हुआ है। गोकुल और वृंदावन की परंपरा अनुसार, इस दिन प्रेम और रंगों के माध्यम से जीवन को आनंदमय बनाना सिखाया जाता है।
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किसानों का त्योहार – नई फसल और रबी सीजन का उल्लास: होली किसानों के लिए भी विशेष महत्व रखती है। यह रबी की फसल के आगमन और खेतों में खुशहाली का संदेश देती है। किसान इस दिन खेतों में मेहनत के उत्सव और नई फसल की प्राप्ति का आनंद मनाते हैं।
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रिश्ते सुधारने का पर्व – ‘बुरा न मानो होली है’: होली लोगों को आपसी मतभेद भूलकर एक-दूसरे से मेल-जोल बढ़ाने और संबंधों को सुधारने का अवसर देती है। इसी कारण इस त्योहार का नारा है – “बुरा न मानो होली है।”
होलिका दहन का यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह लोगों में प्रेम, भाईचारा और सौहार्द को बढ़ावा देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि होली के दौरान सभी लोग सावधानी बरतते हुए अग्निकुंड जलाएं और बच्चों को सुरक्षित रखकर त्योहार का आनंद मनाएं।
इस वर्ष होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजे से आधी रात तक रहेगा। इस दौरान लोग पूजा-अर्चना करेंगे और अग्नि में होली जलाकर बुराइयों का अंत करेंगे। इसके साथ ही रंगों और मिठाईयों के साथ होली का त्योहार पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

