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वाईएसआरसीपी सरकार के प्रतिशोध से अमारा राजा परियोजना तेलंगाना गई: नारा लोकेश

वाईएसआरसीपी सरकार के प्रतिशोध से अमारा राजा परियोजना तेलंगाना गई: नारा लोकेश
वाईएसआरसीपी सरकार के प्रतिशोध से अमारा राजा परियोजना तेलंगाना गई: नारा लोकेश

अमरावती, 16 जुलाई (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश ने गुरुवार को पिछली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार के दौरान अमारा राजा ग्रुप के साथ हुए व्यवहार पर अफसोस जताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की एक प्रमुख घरेलू कंपनी को परेशान किया गया और डराया-धमकाया गया, जिसके कारण आंध्र प्रदेश एक बड़े औद्योगिक अवसर से वंचित रह गया।

तेलंगाना के महबूबनगर जिले के दिविटिपल्ली गीगा कॉरिडोर में अमारा राजा के नए ग्राहक परीक्षण संयंत्र के उद्घाटन पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री नारा लोकेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश को अमारा राजा के चेयरमैन गल्ला जयदेव और उनके परिवार से माफी मांगनी चाहिए।

मंत्री लोकेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "चार दशक से अधिक समय में अमारा राजा सिर्फ आंध्र प्रदेश की सबसे सफल औद्योगिक कंपनियों में से एक नहीं बनी, बल्कि उसने विश्वस्तरीय विनिर्माण क्षमता विकसित की है। कंपनी ने हजारों लोगों को रोजगार दिया है और चित्तूर तथा आंध्र प्रदेश का नाम देश और दुनिया में पहुंचाया है।"

उन्होंने कहा, "पिछली सरकार के दौरान आपकी कंपनी के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वैसा नहीं होना चाहिए था। जो उद्यमी अपने ही राज्य में उद्योग या कारोबार स्थापित करना चाहता है, उसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि उसे डराया-धमकाया जाए।"

मंत्री लोकेश ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आंध्र प्रदेश में शुरू हुई एक कंपनी को अपने विस्तार के अगले चरण के लिए दूसरे राज्य का रुख करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि अमारा राजा की सबसे बड़ी उपलब्धियां उसी राज्य में हासिल होंगी, जहां से उसकी शुरुआत हुई थी।

उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे हम लोगों का भरोसा फिर से जीत रहे हैं, आंध्र प्रदेश एक बार फिर निवेश और कारोबार के लिए तैयार हो रहा है। हमें उम्मीद है कि अमारा राजा की सबसे बड़ी उपलब्धियां उसी राज्य में हासिल होंगी, जहां से उसकी शुरुआत हुई थी। हमारे दरवाजे और दिल हमेशा आपके लिए खुले रहेंगे।"

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, "अमारा राजा की स्थापना गल्ला परिवार ने अमेरिका से लौटने के बाद की थी। इसे चित्तूर जिले के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और रायलसीमा के आर्थिक परिदृश्य को बदलने के विजन के साथ बनाया गया था।"

समय के साथ यह कंपनी भारत की प्रमुख विनिर्माण कंपनियों में शामिल हो गई और इसका कारोबार दुनिया के कई देशों तक पहुंच गया। कंपनी के विस्तार के बावजूद इसके मुख्य विनिर्माण संयंत्र चित्तूर में ही रहे, जिससे हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिला।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान कंपनी और राज्य सरकार के बीच विवाद बढ़ गया। नारा लोकेश ने आरोप लगाया कि इसकी वजह यह थी कि कंपनी के चेयरमैन गल्ला जयदेव तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख सांसद थे।

आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार पर अक्सर निवेशकों और कारोबारियों के प्रति बदले की भावना से काम करने के आरोप लगते रहे हैं। बयान में दावा किया गया है कि सरकार ने कंपनी को आवंटित करीब 253 एकड़ औद्योगिक जमीन वापस लेने की कार्रवाई की। इसके बाद कंपनी की विनिर्माण इकाइयों के खिलाफ भी कई कदम उठाए गए।

आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चित्तूर में अमारा राजा के मुख्य बैटरी प्लांट को बंद करने का नोटिस दिया, जिस पर पूरे देश का ध्यान गया। कानूनी कार्रवाई के दौरान ही कंपनी की सुविधाओं में बिजली और पानी की सप्लाई में रुकावट की खबरें भी सामने आईं।

बयान के अनुसार, कारोबारी माहौल में बढ़ती अनिश्चितता के कारण अमारा राजा ने आखिरकार अपनी 9,500 करोड़ रुपए की लिथियम-आयन गीगा कॉरिडोर परियोजना को पड़ोसी राज्य तेलंगाना में स्थापित करने का फैसला किया। दिविटिपल्ली गीगा कॉरिडोर में ग्राहक परीक्षण संयंत्र के उद्घाटन को इस परियोजना का एक अहम पड़ाव बताया गया है। साथ ही, बयान में कहा गया है कि इससे उस औद्योगिक अवसर की भी याद आती है, जिसे आंध्र प्रदेश खो बैठा।

बयान में कहा गया है कि इस परियोजना से तेलंगाना में हजारों लोगों को रोजगार मिलने और राज्य को बड़ा कर राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चित्तूर के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और आंध्र प्रदेश को मिलने वाला संभावित राजस्व पड़ोसी राज्य को चला गया। इसमें दावा किया गया है कि इसकी वजह पिछली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सरकार की नीतियां और फैसले रहे।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी

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