व्हाट्सएप पर बॉस बनकर ठगे तीन करोड़ रुपए, पुलिस ने 5 घंटे में 2.94 करोड़ किए फ्रीज
अहमदाबाद, 22 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात में एक कंपनी के कर्मचारी ने अपने नियोक्ता के बैंक खाते से तीन करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए। बताया जाता है कि धोखेबाजों ने व्हाट्सएप पर उनके बॉस की तस्वीर और प्रोफाइल का इस्तेमाल किया था।
अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस के संयुक्त हस्तक्षेप से चार से पांच घंटे के भीतर 2.94 करोड़ रुपए फ्रीज कर दिए गए।
डीएसपी तपनसिंह डोडिया ने मंगलवार को बताया कि फ्रीज की गई राशि में से 2.88 करोड़ रुपए अदालत के आदेश से शिकायतकर्ता को लौटा दिए गए हैं, जबकि छह लाख रुपए अभी भी वसूल किए जाने बाकी हैं।
यह घटना 18 अगस्त को चांगोदर पुलिस थाना क्षेत्र में स्थित 'प्योर एंड क्योर' नामक दवा कंपनी में घटी।
कंपनी में लेखाकार के पद पर कार्यरत हार्दिक पटेल को सुबह अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए, जिसमें उनके वरिष्ठ अधिकारी का नाम इस्तेमाल किया गया था।
डीएसपी डोडिया के मुताबिक, व्हाट्सएप अकाउंट में बॉस की तस्वीर और प्रोफाइल विवरण का इस्तेमाल किया गया था, और संचार शैली भी पटेल के असली वरिष्ठ अधिकारी से मिलती-जुलती थी।
डोडिया ने बताया, “नंबर अज्ञात था, लेकिन व्हाट्सएप की डिस्प्ले पिक्चर और प्रोफाइल डिटेल्स उनके बॉस से हूबहू मिलती-जुलती थीं। बोलने का तरीका और भाषा भी मिलती-जुलती थीं, जिसके कारण हार्दिकभाई को लगा कि वह अपने बॉस से बात कर रहे हैं।”
इसके बाद, नकली व्यक्ति ने पटेल से तीन करोड़ रुपए का वित्तीय लेनदेन करने को कहा। अनुरोध को वास्तविक समझकर पटेल ने कंपनी के खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए। लेनदेन पूरा होते ही पटेल ने अपने असली बॉस को फोन किया और उन्हें भुगतान की सूचना दी। उसी बातचीत के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं।
पुलिस को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद पटेल को पुलिस स्टेशन लाया गया और लेन-देन में शामिल खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई शुरू की गई।
डोडिया ने बताया, “कुल लेन-देन तीन करोड़ रुपए का था। इसमें से 2.94 करोड़ रुपए फ्रीज कर दिए गए थे, और फ्रीज की गई राशि में से 2.88 करोड़ रुपए अदालत के आदेश के बाद शिकायतकर्ता को लौटा दिए गए।”
उन्होंने आगे बताया कि शेष राशि की वसूली और शिकायतकर्ता को लौटाने की प्रक्रिया जारी है। धन के लेन-देन की जांच से पता चला कि शुरुआती तीन करोड़ रुपए आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में गोकुल गुरुवर्धन नामक व्यक्ति के प्राथमिक खाते में स्थानांतरित किए गए थे।
उस खाते से छह-छह लाख रुपए के दो लेन-देन किए गए, जिनका कुल योग 12 लाख रुपए था। ये लेन-देन दो अन्य खातों में किए गए। इनमें से एक खाता मध्य प्रदेश में उपदेश यादव नामक व्यक्ति का था, जबकि दूसरा जम्मू-कश्मीर के एक व्यक्ति का था।
डोडिया ने बताया कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या गुंटूर स्थित खाता जालसाजों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक गुप्त खाता था या खाताधारक स्वयं इस अपराध में शामिल था।
उन्होंने कहा, “इस पहलू की जांच चल रही है। हमारी टीम जांच के लिए दूसरे राज्य गई है। खाते के बारे में विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही यह पता चल पाएगा कि यह गुप्त खाता है या खाताधारक स्वयं आरोपी है।”
उन्होंने कहा कि जांचकर्ता निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले खाताधारक के संपूर्ण बैंकिंग इतिहास और लेन-देन की जांच करेंगे।
डोडिया ने कहा, “पूरे लेन-देन की जांच की जा रही है। हम यह पता लगाएंगे कि क्या इतनी बड़ी राशि पहले कभी बैंक खाते में आई थी, क्या लेन-देन संदिग्ध थे, और इनके बीच क्या संबंध है। जब हमारी टीम दूसरे राज्य में गोकुल गुरुवर्धन की जांच करेगी, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या वह इसमें शामिल है, क्या यह एक गुप्त खाता है या कोई अन्य कड़ी है।”
पुलिस ने बताया कि उन्होंने उसी दिन पूरी राशि फ्रीज कर दी थी, लेकिन वसूली के लिए अदालत के आदेश की आवश्यकता थी। डोडिया ने कहा कि अदालती प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2.88 करोड़ रुपए वापस कर दिए गए।
उन्होंने कहा, “पूरी राशि उसी दिन फ्रीज कर दी गई थी, लेकिन वसूली के लिए हमें अदालत से आदेश प्राप्त करना होगा। अदालत का आदेश मिलने के बाद हमें राशि वापस मिल गई।”
पुलिस के अनुसार, एसबीआई खाते में बैंक की प्रक्रिया के कारण छह लाख रुपए अभी भी बकाया है। डोडिया ने बताया कि आवश्यक बैंकिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेष राशि वसूल कर शिकायतकर्ता को लौटा दी जाएगी।
पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी की सूचना मिलने के लगभग चार से पांच घंटे के भीतर ही उन्होंने खाते फ्रीज कर दिए थे। उन्होंने कहा, "चांगोदर पुलिस स्टेशन और एलसीबी साइबर सेल ने लेनदेन की जानकारी मिलने के बाद संयुक्त रूप से कार्रवाई की, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो पाई।"
शिकायतकर्ता को तीन करोड़ रुपए के लेनदेन पर तुरंत संदेह क्यों नहीं हुआ, यह समझाते हुए डोडिया ने कहा कि प्योर एंड क्योर नियमित रूप से रॉ एपीआई और अन्य कच्चे माल की खरीद करती है, और इस तरह के उच्च मूल्य के लेनदेन कंपनी के व्यवसाय का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, “आम तौर पर, कंपनी कच्चे एपीआई और कच्चे माल की खरीद करती है, और हार्दिकभाई के माध्यम से इस तरह के बड़े लेन-देन उनके सामान्य व्यवसाय का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें इतने बड़े लेन-देन में कोई संदेह नहीं हुआ। खाता भी एक कॉर्पोरेट खाता था, इसलिए तीन करोड़ रुपए का लेन-देन एक बार में हो सकता था।”
डोडिया ने कहा कि जिन व्यक्तियों के खातों में पैसा आया है, उनकी पहचान और संलिप्तता का पता उनके बैंकिंग रिकॉर्ड और लेन-देन की जांच के बाद ही लगाया जा सकेगा।
--आईएएनएस
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