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जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार से पहले सियासी हलचल तेज, मंगलवार सुबह 10:30 बजे होगा शपथ ग्रहण समारोह

जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार से पहले सियासी हलचल तेज, मंगलवार सुबह 10:30 बजे होगा शपथ ग्रहण समारोह
जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार से पहले सियासी हलचल तेज, मंगलवार सुबह 10:30 बजे होगा शपथ ग्रहण समारोह

श्रीनगर, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के बाद शपथ ग्रहण समारोह के लिए निमंत्रण जारी किए हैं। यह समारोह मंगलवार सुबह 10:30 बजे लोक भवन में आयोजित किया जाएगा। इसके बाद से पूरे केंद्रशासित प्रदेश में इस बात को लेकर कयासों का दौर तेज हो गया है कि नए मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलेगी और किसे बाहर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ सलाह मशविरा करके पहले ही तय कर ली गई है। उन्होंने अपनी पार्टी के विधायकों को मंत्री पद पाने के लिए लॉबिंग न करने की सलाह दी और कहा कि वे कैबिनेट विस्तार में जगह पाने के लिए दरवाजे न खटखटाएं।

उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से कहा, "कृपया मुझे वॉट्सऐप मैसेज न भेजें। मुझे लंबे-लंबे वॉट्सऐप मैसेज मिल रहे हैं, जिनमें बायो-डेटा और लंबी-लंबी कहानियां होती हैं, जैसे कि मैं उन्हें जानता ही नहीं। कृपया शपथ ग्रहण समारोह तक धैर्य रखें। सबको पता चल जाएगा कि उनकी किस्मत में क्या है।"

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 90 सदस्य हैं और 'पुनर्गठन अधिनियम 2019' के अनुसार, मुख्यमंत्री सहित विधानसभा की कुल संख्या के केवल 10 प्रतिशत सदस्य ही कैबिनेट का हिस्सा बन सकते हैं।

इस समय मुख्यमंत्री सहित कैबिनेट में छह सदस्य हैं। इसलिए उमर तीन और मंत्रियों को शामिल कर सकते हैं, बशर्ते वह नए चेहरों को जगह देने के लिए मौजूदा मंत्रियों में से किसी को हटाना न चाहें।

हालांकि मुख्यमंत्री और एनसी अध्यक्ष को अंतिम सूची की जानकारी है, लेकिन पार्टी के भीतर इस बात को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही हैं कि किसे मंत्री पद मिलेगा। बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने साफ कर दिया है कि पहली बार विधायक बने नेताओं को कैबिनेट में शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे अधिकांश विधायकों के मंत्री बनने की संभावना खत्म हो गई है।

कांग्रेस, जिसके पास छह विधायक हैं, एनसी के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दे रही है। उमर द्वारा कैबिनेट में शामिल होने के प्रस्ताव के बावजूद जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने दोहराया कि उनकी पार्टी सरकार को बाहर से समर्थन देना जारी रखेगी।

कांग्रेस का कहना है कि जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह कैबिनेट से बाहर ही रहेगी।

मंत्री पद की उम्मीद रखने वाले पहली बार के विधायकों को अब किसी और मौके का इंतजार करना होगा। उनकी संभावनाएं उमर अब्दुल्ला के अगले कैबिनेट फेरबदल पर टिकी हैं। पूरी संभावना है कि मंगलवार को हुआ कैबिनेट फेरबदल/विस्तार 2029 तक का आखिरी फेरबदल होगा, जब जम्मू-कश्मीर में अगले विधानसभा चुनाव होने हैं।

उमर ने अपने विधायकों के बीच किसी भी तरह की 'बगावत' की संभावना को खारिज कर दिया है। इसके अलावा, अतीत में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) छोड़कर जाने वालों के अनुभवों को देखते हुए सत्ताधारी पार्टी के किसी विधायक के जम्मू-कश्मीर में कहीं और बेहतर मौके तलाशने की संभावना न के बराबर है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा न कर पाने के कारण जनता में नाराजगी बढ़ती दिख रही है। अब यह देखना बाकी है कि क्या उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नई कैबिनेट लोगों की उम्मीदों पर खरी उतर पाती है और सरकार के कामकाज में सुधार ला पाती है या नहीं।

हालांकि, उमर अब्दुल्ला का यह तर्क कि 'राज्य का दर्जा' न होने की वजह से उनकी सरकार का कामकाज सीमित रहा है, जनता की बढ़ती नाराजगी के बीच शायद ही लोगों को रास आए। एनसी के लिए संदेश बिल्कुल साफ है कि या तो लोगों की उम्मीदों को पूरा करें, वरना उनका भरोसा खोने का जोखिम उठाएं। जम्मू-कश्मीर में पार्टी के राजनीतिक भविष्य के लिए 'काम करके दिखाओ या खत्म हो जाओ' वाली स्थिति ही सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी

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