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दार्जिलिंग को बंगाल से अलग किए बिना निकालेंगे स्थायी राजनीतिक समाधान: गृह मंत्री अमित शाह

कोलकाता, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि अगर इस महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनती है, तो दार्जिलिंग, कुरसियांग और कालिम्पोंग के पहाड़ी इलाकों के लिए स्थायी राजनीतिक समाधान निकाला जाएगा और इसके लिए इन इलाकों को राज्य से अलग नहीं किया जाएगा।
दार्जिलिंग को बंगाल से अलग किए बिना निकालेंगे स्थायी राजनीतिक समाधान: गृह मंत्री अमित शाह

कोलकाता, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि अगर इस महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनती है, तो दार्जिलिंग, कुरसियांग और कालिम्पोंग के पहाड़ी इलाकों के लिए स्थायी राजनीतिक समाधान निकाला जाएगा और इसके लिए इन इलाकों को राज्य से अलग नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ''हम अपने गोरखा भाइयों की मांग का राजनीतिक समाधान करेंगे, लेकिन पहाड़ों को पश्चिम बंगाल से अलग नहीं किया जाएगा। साथ ही पूरे उत्तर बंगाल के विकास पर हमारा सबसे ज्यादा ध्यान रहेगा और हम वहां चार बड़े टाउनशिप बनाएंगे।''

उन्होंने यह बात पश्चिम दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कही। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि अलग गोरखालैंड राज्य की मुख्य मांग के बावजूद यह स्थायी समाधान कैसे होगा।

रैली में गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर बंगाल के विकास के लिए कई और वादे भी किए, जिनमें एक आईआईटी, एक आईआईएम, एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, एक ट्राइबल यूनिवर्सिटी, एक इको-एडवेंचर हब और 600 बेड का कैंसर अस्पताल शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर बंगाल में बोली जाने वाली राजबोंगशी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा।

इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार पर आरोप लगाया कि उसने बांग्लादेश सीमा पर बिना बाड़ वाले इलाकों में तारबंदी के लिए सीमा सुरक्षा बल को 600 एकड़ जमीन नहीं दी।

उन्होंने कहा, ''अगर इस बार पश्चिम बंगाल में हमारी सरकार बनती है, तो 45 दिनों के भीतर बीएसएफ को जमीन दे दी जाएगी। भाजपा ने तय किया है कि नई सरकार बनने के बाद पूरे पश्चिम बंगाल और देश से हर एक घुसपैठिए को बाहर निकाला जाएगा। ये घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, हमारे युवाओं की नौकरियां छीन रहे हैं और गरीबों का हक खा रहे हैं।''

--आईएएनएस

एएमटी/डीएससी

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