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स्ट्रीट लाइट गिरने से बच्ची की मौत, बंगाल सरकार ने परिवार को 4 लाख का मुआवजा दिया

कोलकाता, 26 मई (आईएएनएस)। राज्य सरकार ने उस बच्ची के परिवार को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी, जिसकी मौत मध्य कोलकाता के हेस्टिंग्स इलाके में एक लैंप पोस्ट से लाइट गिरने के बाद हो गई थी।
स्ट्रीट लाइट गिरने से बच्ची की मौत, बंगाल सरकार ने परिवार को 4 लाख का मुआवजा दिया

कोलकाता, 26 मई (आईएएनएस)। राज्य सरकार ने उस बच्ची के परिवार को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी, जिसकी मौत मध्य कोलकाता के हेस्टिंग्स इलाके में एक लैंप पोस्ट से लाइट गिरने के बाद हो गई थी।

प्रदेश के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निर्देश पर मानिकतला से भाजपा विधायक तापस रॉय ने सोमवार रात मृतक बच्ची के पिता एसके फिरोज को 4 लाख रुपए का चेक सौंपा। इस मौके पर बेहाला पश्चिम के विधायक इंद्रनील खान और पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे।

छह साल की बच्ची, जिसका नाम गुड़िया खातून था, अपने परिवार के साथ हेस्टिंग्स इलाके में एक फ्लाईओवर के नीचे रहती थी। फ्लाईओवर के ठीक बगल में एक 'हाई मास्ट' लैंप पोस्ट लगा हुआ है। जानकारी के अनुसार, जब बच्ची उस लैंप पोस्ट के नीचे खेल रही थी, तभी एक लाइट टूटकर गिरी और सीधे उसके सिर पर जा लगी।

इस हादसे में छह साल की बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। बाद में जब उसे एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया, तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार और स्थानीय लोगों ने स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव में लापरवाही का आरोप लगाया है।

पुलिस के अनुसार, बच्ची हर दिन की तरह लैंप पोस्ट के नीचे खेल रही थी। उसी समय, ऊपर से एक लैंप बच्ची के सिर पर गिर गया। इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गई।

छोटी बच्ची के परिवार ने लैंप पोस्ट के रखरखाव में लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि सड़क पर गिरे लैंप में नट लगाने के लिए तीन छेद थे, लेकिन उसमें केवल एक ही नट लगा हुआ था। स्थानीय लोगों ने भी इस बात पर सवाल उठाए हैं कि क्या उस लैंप पोस्ट का रखरखाव नहीं किया गया था।

स्थानीय पुलिस थाने के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं, और उस जगह को बैरिकेड लगाकर घेर दिया गया है। पुलिस पूरी घटना की जांच कर रही है।

गौरतलब है कि हेस्टिंग्स इलाके में घटनास्थल के पास बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। वहां आस-पास कुछ झुग्गियां भी हैं। इन झुग्गियों में रहने वाले स्थानीय लोग अक्सर अपना समय फुटपाथों पर बिताते हैं। इन परिवारों के बच्चे अक्सर सड़कों पर खेलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

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