Samachar Nama
×

कमजोर मानसून से तमिलनाडु में जलविद्युत उत्पादन आधा, राज्य महंगी बिजली खरीदने को मजबूर

कमजोर मानसून से तमिलनाडु में जलविद्युत उत्पादन आधा, राज्य महंगी बिजली खरीदने को मजबूर
कमजोर मानसून से तमिलनाडु में जलविद्युत उत्पादन आधा, राज्य महंगी बिजली खरीदने को मजबूर

चेन्नई, 20 जुलाई (आईएएनएस)। कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून, प्रमुख जलाशयों में कम जल प्रवाह और लंबे समय तक जारी हीटवेव जैसी परिस्थितियों के कारण तमिलनाडु में इस वर्ष जलविद्युत उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके चलते बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए राज्य को बिजली एक्सचेंज से महंगी दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 17 जुलाई के बीच तमिलनाडु में केवल 751.034 मिलियन यूनिट (एमयू) जलविद्युत का उत्पादन हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,509.549 मिलियन यूनिट था। यानी इस वर्ष उत्पादन लगभग आधा रह गया है।

जलविद्युत उत्पादन में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब जुलाई तक बिजली की मांग ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जिससे राज्य की बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

जलविद्युत राज्य के लिए बिजली का सबसे सस्ता स्रोत माना जाता है और इसकी उत्पादन लागत प्रति यूनिट एक रुपये से भी कम रहती है। आमतौर पर तमिलनाडु गर्मियों और अधिक मांग वाले समय में महंगे स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए जलविद्युत उत्पादन को अधिकतम स्तर पर रखता है। लेकिन इस वर्ष लंबे समय तक पड़े भीषण गर्मी के दौर और सामान्य से कम बारिश के कारण जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच सका, जिससे जलविद्युत परियोजनाओं का संचालन प्रभावित हुआ।

जलविद्युत उत्पादन में कमी का सीधा असर राज्य की बिजली वितरण कंपनी पर भी पड़ा है। उत्पादन में आई कमी की भरपाई के लिए पिछले तीन महीनों में बिजली एक्सचेंज से 16 से 20 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान राज्य ने लगभग 2,000 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी, जिससे बिजली खरीद पर होने वाला खर्च काफी बढ़ गया है।

स्थिति को कर्नाटक से कावेरी नदी का पर्याप्त पानी नहीं मिलने से और अधिक गंभीर बना दिया है। इससे उन जलाशयों में पानी की उपलब्धता और घट गई, जिन पर कई जलविद्युत परियोजनाएं निर्भर हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां नहीं बढ़ीं और जलग्रहण क्षेत्रों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो अगले कुछ सप्ताह तक जलविद्युत उत्पादन दबाव में ही रहेगा।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने जलाशयों के रखरखाव की कमी को भी उत्पादन में गिरावट का एक प्रमुख कारण बताया है। उनके अनुसार, भवानीसागर और कुंदाह सहित कुछ जलाशयों में वर्ष 2010 में गाद निकालने (डी-सिल्टिंग) का काम किया गया था, लेकिन उसके बाद कोई बड़ा अभियान नहीं चलाया गया।

अधिकारियों का अनुमान है कि जलाशयों में गाद जमा होने से उनकी प्रभावी जल भंडारण क्षमता करीब 20 प्रतिशत तक घट गई है। इससे मानसून के दौरान पानी संग्रहित करने की क्षमता कम हुई और जलविद्युत उत्पादन भी प्रभावित हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर डी-सिल्टिंग की जाती, तो जलाशयों की भंडारण क्षमता बढ़ती, जलविद्युत उत्पादन में सुधार होता और अधिक मांग के समय राज्य को महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम पड़ती।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

Share this story