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चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने की ईडी की याचिका पर सुनवाई टली, सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। कथित बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मिली जमानत रद्द करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई। ईडी द्वारा अतिरिक्त समय मांगे जाने पर अदालत ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
चैतन्य बघेल की जमानत रद्द करने की ईडी की याचिका पर सुनवाई टली, सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। कथित बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को मिली जमानत रद्द करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई। ईडी द्वारा अतिरिक्त समय मांगे जाने पर अदालत ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ईडी की ओर से स्थगन की मांग पर नाराजगी जताई। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "पहले कहते हैं कि मामले को सूचीबद्ध कीजिए और फिर स्थगन मांग लेते हैं। हम ऐसे मामलों की फाइलें रातभर पढ़ते हैं।"

ईडी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत चैतन्य बघेल को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज कथित शराब घोटाला मामले में जमानत दी गई थी।

इस वर्ष जनवरी में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एकल पीठ के न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा ने चैतन्य बघेल को जमानत प्रदान की थी। ईडी ने उन्हें जुलाई 2025 में वर्ष 2019 से 2023 के बीच संचालित कथित शराब घोटाले की जांच के दौरान गिरफ्तार किया था।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि चैतन्य बघेल पर आबकारी विभाग या राज्य की शराब निगमों में किसी आधिकारिक या वैधानिक पद पर रहने का आरोप नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि उनके खिलाफ आरोप मुख्य रूप से पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों और अन्य आरोपियों से कथित संबंधों पर आधारित हैं।

हाईकोर्ट ने माना था कि चैतन्य बघेल की भूमिका मुख्य रूप से अनुमान और परिस्थितिजन्य तथ्यों पर आधारित है तथा उनके खिलाफ किसी प्रत्यक्ष आपराधिक कृत्य का स्पष्ट आरोप नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है और लंबे समय तक हिरासत में रखना निर्दोषता की संवैधानिक धारणा को कमजोर करेगा।

वहीं, ईडी का आरोप है कि चैतन्य बघेल कथित शराब सिंडिकेट में अहम भूमिका निभा रहे थे और उन्होंने अपराध से अर्जित लगभग एक हजार करोड़ रुपये की राशि का संचालन किया। एजेंसी के अनुसार, इस कथित घोटाले में शराब बिक्री पर अवैध कमीशन, बिना हिसाब-किताब के शराब उत्पादन और आबकारी राजस्व की हेराफेरी शामिल थी, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।

हजारों करोड़ रुपये के इस कथित शराब घोटाले की जांच ईडी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) भी कर रही है। मामले में कई नेताओं, नौकरशाहों और कारोबारियों के खिलाफ चार्जशीट और अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

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