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पानी की कमी से तमिलनाडु के नागपट्टिनम में 11,424 एकड़ सांबा धान की फसल पर संकट

पानी की कमी से तमिलनाडु के नागपट्टिनम में 11,424 एकड़ सांबा धान की फसल पर संकट
पानी की कमी से तमिलनाडु के नागपट्टिनम में 11,424 एकड़ सांबा धान की फसल पर संकट

नागपट्टिनम, 30 सितंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु के नागपट्टिनम जिले के थलैनायर क्षेत्र में पर्याप्त कावेरी जल नहीं मिलने से करीब 11,424 एकड़ में लगी सांबा धान की फसल संकट में है। किसानों का कहना है कि मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने के करीब एक महीने बाद भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी खेतों तक नहीं पहुंचा है, जिससे हाल ही में बोए गए धान के बीज तेज गर्मी में सूख रहे हैं।

इन खेतों की सिंचाई मुख्य रूप से हरिचंद्र नदी पर निर्भर है। किसानों के मुताबिक करीब 20 दिन पहले बोए गए बीजों को अब तक पर्याप्त पानी नहीं मिला है। ऐसे में अगर अब पानी पहुंच भी जाता है तो केवल 50 से 60 फीसदी बीजों के ही अंकुरित होकर फसल बनने की संभावना है।

किसानों के अनुसार, घोषित जल छोड़ने की अवधि में अब करीब 15 दिन ही बाकी हैं। ऐसे में उन्हें इस साल दूसरी बार फसल बर्बाद होने का डर सता रहा है। इससे पहले पानी की कमी के कारण वे कुरुवई धान की फसल भी गंवा चुके हैं।

किसान रामनाथन एम. ने 16 एकड़ में मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों की बुआई की है। उन्होंने कहा कि पानी नहीं मिलने के कारण खेतों में बोए गए बीज सूख गए हैं और अब खेत बंजर जमीन जैसे दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि थलैनायर और वेदारण्यम की ओर जाने वाली नदियों में भी बहुत कम मात्रा में पानी पहुंचा है, जबकि कई शाखा नहरें अभी भी सूखी पड़ी हैं।

मेट्टूर बांध को इस साल 1 सितंबर को खोला गया, जो सामान्य निर्धारित तारीख 12 जून से 81 दिन बाद है। सरकार की ओर से 45 दिनों तक पानी छोड़ने की घोषणा के बाद किसानों ने मध्यम अवधि वाली सांबा धान की किस्मों की सीधे बुआई शुरू की थी। हालांकि, किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने के लिए 45 दिनों की जल आपूर्ति अवधि पर्याप्त नहीं है।

कम बारिश ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। खासकर जिले के अंतिम छोर वाले सिंचाई क्षेत्रों में पानी की भारी कमी बनी हुई है। किसानों का कहना है कि जिले तक केवल कुछ सौ क्यूसेक पानी ही पहुंच पाया है, जिससे थलैनायर क्षेत्र के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

पानी की कमी ने किसानों की आर्थिक मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। किसानों ने बताया कि कुरुवई फसल के नुकसान के बाद सांबा की खेती शुरू करने के लिए उन्होंने निजी साहूकारों से कर्ज लिया था।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि बैंकों और सहकारी समितियों से कृषि ऋण लेना मुश्किल हो गया है। उनके मुताबिक ग्राम प्रशासनिक अधिकारियों (वीएओ) की ओर से कहा गया कि खेत में फसल उगने के बाद ही अडंगल प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है।

इस बीच, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तिरुवरूर के थट्टनकोविल से करीब 700 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है और इसके बुधवार रात तक हरिचंद्र नदी में पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, किसानों का कहना है कि अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह पानी केवल करीब डेढ़ दिन तक ही उपलब्ध रहेगा, क्योंकि अन्य नहरों को भी पानी की जरूरत है।

किसानों का कहना है कि इतनी कम अवधि के लिए पानी छोड़े जाने से मुश्किल से आधे क्षेत्र की सिंचाई हो पाएगी। इससे हजारों एकड़ खेतों में खड़ी या हाल ही में बोई गई सांबा फसल के नुकसान का खतरा बना रहेगा। किसानों को आशंका है कि निर्धारित जल आपूर्ति अवधि खत्म होने से पहले उनकी फसल को बचाना मुश्किल हो सकता है।

--आईएएनएस

डीएससी

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