उत्तराखंड सैनिकों के कल्याण में सबसे आगे, अग्निवीरों के लिए एक समर्पित रोजगार सेल
देहरादून, 27 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तराखंड सैनिकों के कल्याण के मामले में दूसरे राज्यों के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। राज्य सरकार ने सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीद परिवारों के लिए कई कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में, राज्य सरकार ने सशस्त्र बलों के समुदाय के कल्याणकारी कामों को प्राथमिकता दी है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने सशस्त्र बलों में चार साल की सेवा पूरी करके घर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए एक खास 'रोजगार सेल' बनाया है।
धामी कैबिनेट ने हाल ही में इस रोजगार सेल को मंजूरी दी है, जो अग्निवीरों को सही नौकरी के मौके खोजने में मदद करेगा। राज्य सरकार ने पहले ही सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी।
सरकार ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों की मूर्तियां उनके पैतृक गांवों में लगाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इस पहल का मकसद उनकी विरासत को संजोना, युवा पीढ़ियों को प्रेरित करना और उनके परिवारों का सम्मान करना है।
परमवीर चक्र विजेताओं के परिवारों के लिए अनुग्रह राशि 1.5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपए कर दी गई है। अन्य शहीदों के आश्रितों के लिए, यह सहायता राशि 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए कर दी गई है। वीरता पुरस्कार पाने वाले सैनिकों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता भी बढ़ाई गई है।
इस बीच, देहरादून में 'सैन्य धाम' का निर्माण पूरा हो चुका है और इसके उद्घाटन की तैयारियां चल रही हैं। उत्तराखंड के शहीद सैनिकों की याद में बनाए गए इस स्मारक में शहीदों के घरों और आंगन से पूरे सम्मान के साथ लाई गई मिट्टी रखी गई है। इस जगह पर उनकी वीरता की कहानियां भी प्रदर्शित की गई हैं।
राज्य सरकार हर शहीद के परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी भी दे रही है। अब तक, 28 योग्य आश्रितों को सरकारी सेवा में नियुक्त किया जा चुका है। आवेदन जमा करने की समय-सीमा दो साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है।
सशस्त्र बलों के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों को 25 लाख रुपए तक की संपत्ति खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी मिलती है। सरकार ने जिला अदालतों में लंबित जमीन धोखाधड़ी के मामलों का सामना कर रहे सेवारत सैनिकों और पूर्व सैनिकों के परिवारों की मदद के लिए भी कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, "हमारी सरकार बहादुर सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीदों के परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सैन्य धाम उत्तराखंड की समृद्ध सैन्य विरासत का प्रतीक बनेगा।"
--आईएएनएस
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