महाराष्ट्र में संभावित कमजोर मानसून को लेकर अलर्ट, सीएम फडणवीस ने दिए निर्देश
मुंबई, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पानी की सख्त योजना और संरक्षण के उपाय लागू करें, ताकि अगस्त 2026 के आखिर तक पीने के पानी की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने अल नीनो घटना के कारण बारिश में संभावित रुकावटों की चेतावनी भी दी।
यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब राज्य के बांधों में फिलहाल 653.63 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी जमा है। यह पिछले साल इसी समय के 551.86 हजार मिलियन क्यूबिक फीट के मुकाबले 101.77 हजार मिलियन क्यूबिक फीट ज्यादा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल संसाधन) दीपक कपूर ने राज्य कैबिनेट की समीक्षा बैठक में जलाशयों के जल स्तर से जुड़े आंकड़े पेश किए और अल नीनो से जुड़े जोखिमों के प्रति आगाह किया।
पिछले रुझान बताते हैं कि ऐसे वर्षों में जल भंडारण में भारी गिरावट आती है। 2014 में जलस्तर 12 प्रतिशत और 2015 में लगभग 14 प्रतिशत तक गिर गया था, जिससे बड़े पैमाने पर पानी की किल्लत पैदा हो गई थी।
15 अक्टूबर 2014 को जल भंडारण 872 हजार मिलियन क्यूबिक फीट था, जो 2015 में तेजी से गिरकर 625 हजार मिलियन क्यूबिक फीट रह गया था।
इसके विपरीत, 2025 में इसी तारीख को जल भंडार काफी ज्यादा, यानी 1330.97 हजार मिलियन क्यूबिक फीट था।
21 अप्रैल 2026 तक जल भंडारण 653.63 हजार मिलियन क्यूबिक फीट है, जो पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है, लेकिन अगर बारिश कम होती है तो यह स्थिति नाजुक हो सकती है।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे संभावित कमजोर मॉनसून के प्रभाव को कम करने के लिए अभी से पानी बचाना शुरू कर दें। उन्होंने जल संरक्षण की परियोजनाओं में तेजी लाने, प्रबंधन प्रणालियों में सुधार करने और पानी के पारंपरिक स्रोतों को पुनर्जीवित करने का भी आह्वान किया।
यह इस सप्ताह मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली दूसरी उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक थी।
इससे पहले सोमवार को उन्होंने अल नीनो से जुड़ी चुनौतियों की आशंका को देखते हुए विभागों को आपदा से निपटने की तैयारियों और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।
इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने "जल प्रबंधन कार्य पखवाड़ा" पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से जल प्रबंधन को और अधिक गतिशील, जन-केंद्रित और प्रभावी बनाना है।
'गोदा से नर्मदा' 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर जल-यात्रा 2026' का आयोजन किया गया है।
जल संसाधन मंत्री (गोदावरी और कृष्णा घाटी विकास निगम) राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की कि इस यात्रा का उद्देश्य जल संरक्षण का व्यापक संदेश दूर-दूर तक पहुंचाना है।
मंत्री विखे-पाटिल ने कहा कि यह जल-यात्रा 'विचार, विरासत और विकास' के तीन स्तंभों पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से जागरूकता फैलाते हुए सतत जल प्रबंधन की अवधारणा को मजबूत करना है।
मंत्री ने बताया कि पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर, यह पहल उनके दूरदर्शी और जन-केंद्रित शासन से प्रेरणा लेते हुए जल प्रबंधन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने का प्रयास करती है।
उन्होंने आगे कहा कि यह यात्रा मंदिरों के पुनर्निर्माण, नदी घाटों और बावड़ियों (बारव) के निर्माण, तथा लघु सिंचाई और जल संरक्षण परियोजनाओं के कार्यान्वयन की उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करेगी।
--आईएएनएस
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