ईरान में कट्टरपंथी नेताओं का प्रभाव, अमेरिका की बदली रणनीति की सफलता पर सवाल : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिका ईरान के खिलाफ एक नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अब वह केवल सैन्य कार्रवाई पर निर्भर रहने के बजाय एक अधिक संगठित और व्यापक आर्थिक दबाव की नीति के साथ आगे बढ़ रहा है। यह तरीका मध्य पूर्व संघर्ष के शुरुआती दौर में शुरू किए गए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' से अलग बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अब ईरान में आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के कट्टरपंथी नेताओं का प्रभाव बढ़ने के कारण इस नई रणनीति के सफल होने की संभावना कम दिखाई देती है।
इंडिया नैरेटिव में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, इतिहास बताता है कि कड़े प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव ने उन शासन व्यवस्थाओं पर सीमित असर दिखाया है जिनकी विचारधारा कठोर हो और जिनकी संस्थाएं तथा व्यवस्था अंदर से मजबूत हों।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रणनीति के ढांचे और संचालन के स्तर पर यह बदलाव महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव को लेकर सवाल बने हुए हैं। नए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का उद्देश्य ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करना है और उसे मिलने वाली प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आर्थिक मदद को रोकना है।
इससे पहले चलाए गए 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' का लक्ष्य भी आर्थिक दबाव बनाना था लेकिन उसकी कार्रवाई अपेक्षाकृत सीमित और चुनिंदा क्षेत्रों तक केंद्रित थी।
लेख के अनुसार, चूंकि पारंपरिक सैन्य ताकत का इस्तेमाल ईरान को पूरी तरह पीछे धकेलने में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहा है, इसलिए अमेरिकी सुरक्षा तंत्र ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए सैन्य शक्ति के साथ-साथ गैर-सैन्य विकल्पों पर भी जोर देना शुरू किया है। सरल शब्दों में कहें तो अब आर्थिक दबाव को और अधिक आक्रामक तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है।
रिपोर्ट का कहना है कि इस बदलाव से अमेरिका को दो संभावित फायदे मिल सकते हैं। पहला, हथियारों और गोला-बारूद के भंडार पर दबाव कम होगा। दूसरा, सैन्य दबाव बनाए रखते हुए कूटनीतिक बातचीत के लिए भी कुछ जगह बनी रहेगी।
लेख में कहा गया है कि अमेरिका के सैन्य संसाधनों पर दबाव एक वास्तविक चिंता का विषय बनता जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना अपने 'थाड' इंटरसेप्टर मिसाइल भंडार का लगभग 80 प्रतिशत और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम के लगभग आधे संसाधन इस्तेमाल कर चुकी है।
इसके अलावा, लंबी दूरी की मिसाइलों का भंडार भी दबाव में बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, कई महीनों से जारी सैन्य अभियानों ने इन भंडारों को काफी हद तक कम कर दिया है।
लेख के मुताबिक, अमेरिका के सैन्य भंडार की यह स्थिति और लंबे समय तक बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई जारी रखने की क्षमता पर पड़ने वाला असर, उसकी वैश्विक तैयारी और दुनिया के अन्य क्षेत्रों में संभावित खतरों का सामना करने की क्षमता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
--आईएएनएस
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