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मिसाइल रक्षा को लेकर अमेरिका की नई रणनीति, चीन पर खास फोकस

वॉशिंगटन, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका में मिसाइल रक्षा को लेकर हुई एक अहम संसदीय सुनवाई में चीन को मुख्य रणनीतिक चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया। रक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी कि बीजिंग की तेजी से बढ़ती सैन्य क्षमताएं अमेरिका की घरेलू सुरक्षा ढांचे में बड़े बदलाव को मजबूर कर रही हैं।
मिसाइल रक्षा को लेकर अमेरिका की नई रणनीति, चीन पर खास फोकस

वॉशिंगटन, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका में मिसाइल रक्षा को लेकर हुई एक अहम संसदीय सुनवाई में चीन को मुख्य रणनीतिक चुनौती के रूप में चिन्हित किया गया। रक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी कि बीजिंग की तेजी से बढ़ती सैन्य क्षमताएं अमेरिका की घरेलू सुरक्षा ढांचे में बड़े बदलाव को मजबूर कर रही हैं।

पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तावित “गोल्डन डोम” मिसाइल शील्ड को लेकर कहा कि इसकी रूपरेखा तैयार करने में चीन सबसे बड़ी दीर्घकालिक चुनौती के रूप में सामने आया है। हालांकि, इस परियोजना की लागत, व्यवहार्यता और रणनीतिक प्रभाव को लेकर सांसदों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।

अंतरिक्ष नीति के सहायक रक्षा सचिव मार्क बर्कोविट्ज़ ने कहा, “चीन हमारा प्रमुख प्रतिस्पर्धी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का लक्ष्य टकराव नहीं, बल्कि “मजबूती की स्थिति से चीन को रोकना” है।

प्रस्तावित “गोल्डन डोम” प्रणाली को बहु-स्तरीय और बहु-क्षेत्रीय रक्षा ढांचे के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो बैलिस्टिक, हाइपरसोनिक और उन्नत क्रूज मिसाइल खतरों से निपटने में सक्षम होगी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में चीन ने तेजी से प्रगति की है।

बर्कोविट्ज़ ने चेतावनी दी कि अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देश अपने हथियारों के भंडार को लगातार बढ़ा रहे हैं और उन्हें अधिक उन्नत बना रहे हैं। वे मिसाइल और हवाई प्रणालियों को एकीकृत कर संयुक्त अभियानों के जरिए अमेरिकी ताकत को चुनौती दे रहे हैं।

अमेरिकी नॉर्दर्न कमांड और नोराड के कमांडर जनरल ग्रेगरी गिलोट ने कहा कि विरोधी देश लगातार नई क्षमताएं हासिल करने में जुटे हैं और आपसी सहयोग के जरिए अमेरिकी रक्षा प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

“गोल्डन डोम” पहल का नेतृत्व कर रहे जनरल माइकल गुएटलिन ने चेतावनी दी कि “एक पीढ़ी में पहली बार अमेरिका की सुरक्षा की बढ़त कम हो गई है” और देश अब उन्नत मिसाइल खतरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो गया है।

उन्होंने बताया कि नई प्रणाली में अंतरिक्ष आधारित और जमीनी रक्षा तंत्र को एकीकृत कर एक ऐसा नेटवर्क बनाया जाएगा, जो जमीन, समुद्र, हवा और अंतरिक्ष से आने वाले खतरों का मुकाबला कर सके।

हालांकि, कई सांसदों ने इस योजना पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि चीन जैसे देश नई रणनीतियों और तकनीकों के जरिए इस तरह की रक्षा प्रणाली को पीछे छोड़ सकते हैं।

सांसद सेथ मोल्टन ने कहा कि हाल की अमेरिकी नीतियों ने “चीन की स्थिति को और मजबूत किया है” और मिसाइल रक्षा प्रणाली सभी खतरों के खिलाफ “अभेद्य ढाल” नहीं बन सकती।

मिसाइल डिफेंस एजेंसी के जनरल हीथ कॉलिन्स ने भी माना कि इतिहास में हर नई रक्षा तकनीक के जवाब में विरोधी देश तुरंत नई रणनीतियां विकसित कर लेते हैं।

इसके बावजूद पेंटागन का मानना है कि “गोल्डन डोम” परियोजना चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी है, क्योंकि इससे हमले की योजना बनाना मुश्किल होगा और उन्हें रोकने के अधिक अवसर मिलेंगे।

यह सुनवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच सैन्य, तकनीकी और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज होती जा रही है। मिसाइल रक्षा अब इस रणनीतिक मुकाबले का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनती जा रही है।

--आईएएनएस

डीएससी

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