अमेरिका ने यूएनएससी में फ्रांस के खिलाफ किया वॉकआउट, मानवाधिकार प्रमुख के चुनाव को लेकर हुआ टकराव
संयुक्त राष्ट्र, 28 जुलाई (आईएएनएस)। वोल्कर टर्क को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख के तौर पर फिर से चुना गया। इसे लेकर वाशिंगटन और पेरिस में टकराव शुरू हो गया है। यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान फ्रांस के प्रतिनिधि के बोलना शुरू करते ही अमेरिका ने विरोधस्वरूप बैठक से वॉकआउट कर दिया।
यूक्रेन को लेकर आयोजित चर्चा के दौरान सोमवार को अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक डैन नेग्रिया ने फ्रांस पर मानवाधिकार के मुद्दे पर "दिखावटी नैतिकता" का आरोप लगाया। उन्होंने यह टिप्पणी उस समय की, जब फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट अपना वक्तव्य शुरू कर रहे थे और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बैठक छोड़कर बाहर चला गया।
दोनों पश्चिमी सहयोगी देशों के बीच यह विवाद संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को हुए मतदान से शुरू हुआ, जिसमें वोल्कर तुर्क को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में दूसरा कार्यकाल दिया गया। अमेरिका और रूस ने उनके पुनर्नियुक्ति का विरोध किया और मतदान में उनके खिलाफ वोट भी दिया, लेकिन वे उन्हें रोकने में असफल रहे।
टर्क को अक्टूबर से शुरू होने वाले दूसरे कार्यकाल के लिए 144 देशों का समर्थन मिला, जबकि 10 देशों ने विरोध में मतदान किया और 13 देशों ने मतदान से दूरी बनाई। हालांकि वोल्कर टर्क भारत की भी आलोचना कर चुके हैं, फिर भी भारत ने उनके पुनर्नियुक्ति के पक्ष में मतदान किया।
किसी करीबी सहयोगी देश के खिलाफ इस तरह का अमेरिकी वॉकआउट बेहद असामान्य माना जा रहा है। इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका के कई पारंपरिक सहयोगी देशों के बीच बढ़ते मतभेदों का संकेत माना जा रहा है।
फ्रांस ने शनिवार को जिनेवा स्थित अपने संयुक्त राष्ट्र मिशन के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट किया था, जिसमें वोल्कर टर्क के मुद्दे पर अमेरिका के रूस और उत्तर कोरिया के साथ खड़े होने पर तंज कसा गया। इसी पोस्ट के बाद ट्रंप प्रशासन की नाराजगी और बढ़ गई।
जिनेवा से, जहां यूएन मानवाधिकार ऑफिस है, फ्रेंच मिशन ने कहा, “अमेरिका पहले मानवाधिकार का प्रतीक हुआ करता था लेकिन अब नहीं। आज, यह उत्तर कोरिया, निकारागुआ, माली और रूस के साथ अलग-थलग खड़ा है और दुनिया अब इनकी बात नहीं सुनती।”
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज ने एक्स पर फ्रांस पर पलटवार करते हुए लिखा, "फ्रांस ने ऐसे व्यक्ति के पक्ष में मतदान किया है, जो अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल जैसे स्वतंत्र और संप्रभु लोकतांत्रिक देशों को लगातार नसीहत देता रहा है, जबकि दुनिया के सबसे दमनकारी शासनों के प्रति नरम रुख अपनाता है।"
उन्होंने कहा, "यह निराशाजनक है, हालांकि हैरान करने वाला नहीं कि फ्रांस मानवाधिकारों का सबसे अधिक उल्लंघन करने वाले कुछ देशों को संरक्षण देने वाले अपने शर्मनाक मतदान से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की रणनीति अपना रहा है।"
वहीं, अमेरिकी राजनयिक डैन नेग्रिया ने सुरक्षा परिषद में कहा कि जब तक फ्रांस अपनी "अहंकारी और अपमानजनक भाषा" नहीं छोड़ता और सुरक्षा परिषद के सदस्य के अनुरूप व्यवहार नहीं करता, तब तक अमेरिका "उसकी राजनीतिक बयानबाजी सुनने को तैयार नहीं है।"
नेग्रिया ने आरोप लगाया कि "फ्रांस हर मुद्दे पर नैतिक आक्रोश दिखाने और बाकी देशों को उपदेश देने का दिखावा करता है। चाहे वह यूक्रेन का वही संघर्ष हो, जिस पर आज फिर चर्चा हो रही है, या फिर मानवाधिकार जैसे ऐसे मुद्दे, जिनका अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से सीधा संबंध भी नहीं है।"
उन्होंने कहा, "इसी वजह से हमने फ्रांस के वक्तव्य के दौरान बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया।"
वोल्कर टर्क ने अपने कार्यकाल के दौरान अमेरिका, रूस और उनके सहयोगी देशों सहित कई देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड की आलोचना की है। यही कारण है कि उनके बयानों को लेकर अमेरिका और रूस दोनों ने उनके दोबारा चुनाव का विरोध किया, हालांकि टर्क ने विभिन्न स्तरों पर अधिकांश देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए हैं।
अमेरिका महासभा में मतदान को टालने के अपने प्रस्ताव के समर्थन में केवल 27 वोट ही जुटा सका, जबकि 63 देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया और 47 देशों ने मतदान से परहेज किया।
इसके बाद रूस ने एक और प्रस्ताव रखा कि संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव के कार्यभार संभालने के बाद अगले वर्ष मानवाधिकार प्रमुख का चुनाव कराया जाए। हालांकि, यह प्रस्ताव भी 71 वोटों के मुकाबले 19 वोटों से खारिज हो गया, जबकि 52 देशों ने मतदान से परहेज किया।
भारत ने दोनों प्रस्तावों पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया और अनुपस्थित रहा। हालांकि अमेरिका और रूस दोनों ने वोल्कर टर्क के दोबारा चुनाव का विरोध किया, लेकिन दोनों ने उन पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप भी लगाया।
संयुक्त राष्ट्र में रूस के उप-स्थायी प्रतिनिधि दिमित्री चुमाकोव ने कहा कि वोल्कर टर्क और उनका कार्यालय "राजनीतिक पक्षपात" दिखाते हुए मानवाधिकारों के संरक्षण के नाम पर पश्चिमी देशों के भू-राजनीतिक हितों को आगे बढ़ा रहे हैं।
वहीं, अमेरिकी प्रतिनिधि बार्टोस ने आरोप लगाया कि टर्क अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, इटली और विशेष रूप से इजरायल जैसे स्वतंत्र लोकतांत्रिक देशों की किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक आलोचना करते हैं।
टर्क के दोबारा चुने जाने के बाद बार्टोस ने एक्स पर लिखा कि वोल्कर टर्क ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय को मृत्युशैया पर पहुंचा दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "आज के मतदान ने उसकी अंतिम विदाई पर मुहर लगा दी।"
--आईएएनएस
केके/पीएम

