अमेरिकी सीनेटर ने ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा की लागत और व्यवहार्यता पर सवाल उठाए, चीन के अंतरिक्ष खतरे को किया चिह्नित
वॉशिंगटन, 28 मार्च (आईएएनएस)। एक वरिष्ठ अमेरिकी सीनेटर ने प्रस्तावित “गोल्डन डोम” मिसाइल रक्षा प्रणाली की लागत और व्यवहार्यता को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि चीन की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताएँ अमेरिकी संसाधनों के लिए नए रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती हैं।
अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति में मार्क केली ने अमेरिकी स्पेस कमांड और स्ट्रैटेजिक कमांड पर हुई सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या यह महत्वाकांक्षी मिसाइल रक्षा ढांचा बड़े स्तर पर अपने वादों को पूरा कर पाएगा।
केली ने कहा, “मैं समझता हूँ कि एक अधिक मजबूत मिसाइल रक्षा संरचना ‘डिटरेंस बाय डिनायल’ को मजबूत कर सकती है और देश की अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकती है लेकिन बड़े पैमाने पर यह लागत, क्षमता और भौतिकी का सवाल बन जाता है।”
उन्होंने कहा, “मेरी बड़ी चिंता यह है कि हम 500 अरब या 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर दें और समयसीमा के अंत तक हमारे पास ऐसा सिस्टम हो जो मूल रूप से काम ही न करे या पर्याप्त रूप से प्रभावी न हो।”
प्रस्तावित प्रणाली एक बहु-स्तरीय ढाल की कल्पना करती है, जो बड़े पैमाने पर मिसाइल हमलों को रोक सके, जिनमें हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स और उन्नत क्रूज़ मिसाइल जैसे जटिल खतरे शामिल हैं।
एडमिरल रिचर्ड कॉरेल ने केली के सवालों के जवाब में कहा कि इस प्रयास की शुरुआत डिटेक्शन और ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करने से होगी। उन्होंने कहा, “सेंसर लेयर पर शुरुआती काम और उन्नत मिसाइलों का पता लगाने और उनका पीछा करने की क्षमता… यही इस संरचना का पहला कदम है।”
केली ने उभरते खतरों, खासकर चाल बदलने में सक्षम हाइपरसोनिक हथियारों से निपटने की आवश्यकता को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग दिशा और प्लेटफॉर्म से छोड़ी गई कई मिसाइलों को रोकना कितना कठिन है।
कॉरेल ने कहा कि इस प्रणाली के लिए कई विकसित होती तकनीकों की जरूरत होगी, जिनमें अंतरिक्ष-आधारित इंटरसेप्टर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, “यह एक ऐसी तकनीक है जिसे हमें विकसित करना होगा, ताकि हम इसकी इंटरसेप्शन क्षमता की सीमाओं को समझ सकें।”
सुनवाई में चीन की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं पर भी चर्चा हुई, जिसे केली ने एक बड़ी चिंता बताया।
उन्होंने कहा, “रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल चीन के एसजे-5 और एसजे-21 ने कक्षा में पैंतरेबाज़ी की और संभवतः सैटेलाइट रीफ्यूलिंग का प्रयोग किया। अगर यह पुष्टि होती है, तो यह पहली बार होगा जब जियो कक्षा में एक सैटेलाइट ने दूसरे को ईंधन भरा।”
केली ने चेतावनी दी कि ऐसे विकास से चीन अपने उपग्रहों की उम्र बढ़ा सकता है, उन्हें नई जगह पर तैनात कर सकता है और संभावित रूप से अमेरिकी सिस्टम के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
अमेरिकी स्पेस कमांड के प्रमुख जनरल स्टीफन व्हाइटिंग ने कहा कि वाशिंगटन इन गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है। चीन ने कक्षा में अपनी उन्नत क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिसमें व्यापक पैंतरेबाज़ी क्षमता विकसित करना शामिल है।
व्हाइटिंग ने चेतावनी दी कि यदि बीजिंग अंतरिक्ष में स्थायी पैंतरेबाज़ी क्षमता विकसित कर लेता है, तो उसे वैसा ही रणनीतिक लाभ मिल सकता है जैसा अमेरिका ने ऐतिहासिक रूप से जमीन, समुद्र और हवा में युद्ध के दौरान हासिल किया है।
उन्होंने कहा, “मेरी चिंता है कि अगर वे इसे विकसित कर लेते हैं, तो उन्हें लाभ के लिए पैंतरेबाज़ी करने की क्षमता मिल जाएगी… मेरा मानना है कि हमें भी अपनी पैंतरेबाज़ी युद्ध क्षमता विकसित करनी चाहिए, ताकि हम अंतरिक्ष में अपनी संयुक्त सैन्य ताकत के लाभ को बनाए रख सकें।”
--आईएएनएस
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