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अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार को बताया स्थिर, सुधार की जरूरत बताई

वाशिंगटन, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राज्य अमेरिका ने चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को "स्थिर" बताया है, साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सुधार नहीं किए गए तो वैश्विक व्यापार प्रणाली "कम प्रासंगिक" होने का जोखिम है।
अमेरिका ने चीन के साथ व्यापार को बताया स्थिर, सुधार की जरूरत बताई

वाशिंगटन, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राज्य अमेरिका ने चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को "स्थिर" बताया है, साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सुधार नहीं किए गए तो वैश्विक व्यापार प्रणाली "कम प्रासंगिक" होने का जोखिम है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने मंगलवार (स्थानीय समय) को हडसन इंस्टीट्यूट में कहा, "वाशिंगटन बीजिंग के साथ सतर्कता पूर्ण संतुलन बनाए हुए है। आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करते हुए तनाव को बढ़ने से रोक रहा है। फिलहाल, अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंध स्थिर हैं। हम किसी बड़े टकराव की तलाश में नहीं हैं।"

ग्रीर ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका "बढ़ते व्यापार घाटे" से निपटने के प्रयासों के तहत विशेष रूप से उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में चीनी वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाना जारी रखे हुए है।

ग्रीर ने बताया कि पिछले साल चीन के साथ अमेरिकी वस्तुओं का व्यापार घाटा 130 अरब डॉलर कम हो गया, जो 30 प्रतिशत की गिरावट है और ये "वास्तविक बदलाव" का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि वाशिंगटन दुर्लभ पृथ्वी सामग्रियों तक पहुंच सहित आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने का भी प्रयास कर रहा है, जो बीजिंग के साथ चल रही चर्चाओं का केंद्र बिंदु बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “हम चीनियों के साथ लगभग हमेशा ही दुर्लभ पृथ्वी धातुओं के बारे में बात करते हैं। अमेरिका भी घरेलू आत्मनिर्भरता और निर्भरता कम करने के लिए साझेदारी पर काम कर रहा है।"

एक प्रश्न के उत्तर में ग्रीर ने फार्मास्यूटिकल्स में आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों की ओर भी इशारा किया और बताया कि हालांकि भारत सक्रिय फार्मास्युटिकल घटकों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है लेकिन महत्वपूर्ण कच्चे माल अक्सर चीन से आते हैं।

ग्रीर ने कहा, “लोग कहेंगे, 'ठीक है, हमें अपने अधिकांश एपीआई भारत से मिलते हैं।' यह सच हो सकता है, लेकिन प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियां उन्हें चीन से मिल रही हैं। मैंने इस समस्या के समाधान के बारे में भारतीयों के साथ कई बार बातचीत की है।”

वैश्विक व्यापार संरचना पर व्यापक चर्चा करते हुए, ग्रीर ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की कड़ी आलोचना की और चेतावनी दी कि इसकी अनुकूलन क्षमता में कमी इसे और भी हाशिए पर धकेल सकती है।

उन्होंने कहा, "यदि डब्ल्यूटीओ खुद को समायोजित करने में विफल रहता है, तो इसके परिणाम स्वरूप डब्ल्यूटीओ पहले से भी अधिक अप्रासंगिक हो जाएगा।"

उन्होंने कैमरून में हुई हालिया मंत्रिस्तरीय बैठक का उदाहरण दिया, जहां देश डिजिटल वस्तुओं पर टैरिफ पर लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंध को बढ़ाने पर सहमत नहीं हो सके।

इस मुद्दे को "लिटमस टेस्ट" बताते हुए, ग्रीर ने कहा कि अमेरिका ने इस प्रतिबंध को स्थायी करने या चार साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन "ब्राजील और तुर्की, ऐसा करने को तैयार नहीं थे।"

उन्होंने कहा, "यह इस बात का प्रतीक है कि डब्ल्यूटीओ कितना पिछड़ा हुआ है।"

ग्रीर ने वैश्विक व्यापार में संरचनात्मक असंतुलनों, विशेष रूप से राज्य समर्थित अर्थव्यवस्थाओं द्वारा संचालित अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पर भी प्रकाश डाला। व्यापक व्यापार नीति पर ग्रीर ने कहा कि प्रशासन घरेलू विनिर्माण को पुनर्जीवित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

उन्होंने कहा, "ये सभी संकेतक बिल्कुल सही दिशा में जा रहे हैं, लंबे समय तक गिरावट के बाद फरवरी में विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। व्यापार नीति एक व्यापक रणनीति का मात्र एक हिस्सा है जिसमें टैक्स, ऊर्जा और नियामक उपाय शामिल हैं।

ग्रीर ने डिजिटल व्यापार नियमों को लेकर यूरोपीय संघ के साथ तनाव का भी जिक्र किया और चेतावनी दी कि अमेरिकी कंपनियों को डिजिटल मार्केट्स एक्ट जैसे उपायों के तहत "भेदभावपूर्ण" नियमों का सामना करना पड़ रहा है।

--आईएएनएस

ओपी/पीएम

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