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अमेरिका ने जी20 बैठक के दौरान ईरान मुद्दे पर चीन और रूस से की बातचीत: स्कॉट बेसेंट

अमेरिका ने जी20 बैठक के दौरान ईरान मुद्दे पर चीन और रूस से की बातचीत: स्कॉट बेसेंट
अमेरिका ने जी20 बैठक के दौरान ईरान मुद्दे पर चीन और रूस से की बातचीत: स्कॉट बेसेंट

एशविले, 2 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान अमेरिका ने ईरान को लेकर चीन और रूस के साथ बातचीत की। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीन ने होर्मुज स्‍ट्रेट को दोबारा खोलने में मदद करने का कोई विशेष वादा नहीं किया है।

बेसेंट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन को उम्मीद है कि इन चर्चाओं के आधार पर आगे और बातचीत बढ़ाई जा सकती है, क्योंकि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक रणनीति के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने नॉर्थ कैरोलिना के एशविल में हुई दो दिवसीय बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "हमने रूस और चीन के साथ काफी शांत तरीके से बातचीत की है और मुझे लगता है कि हम इस चर्चा को आगे बढ़ा सकते हैं।"

बेसेंट ने कहा कि आर्थिक और रणनीतिक मतभेदों के बावजूद ईरान के मामले में अमेरिका और चीन के कुछ साझा हित हैं। ईरान के मुद्दे पर चीन के साथ हमारी समानताएं मतभेदों से ज्यादा हैं।

उन्होंने कहा, "चीन भी मानता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। चीन यह भी मानता है कि होर्मुज स्‍ट्रेट में समुद्री व्यापार स्वतंत्र रूप से चलता रहना चाहिए।"

बेसेंट ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र से आने वाली ऊर्जा पर चीन की बड़ी निर्भरता है, इसलिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने में उसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।

उन्होंने कहा क‍ि चीन अपनी लगभग 50 प्रतिशत ऊर्जा खाड़ी क्षेत्र से प्राप्त करता है। इसलिए मेरा मानना है कि समाधान की दिशा में काम करना चीन की जिम्मेदारी भी है। अब हमें देखना होगा कि वह आगे क्या कदम उठाता है। हालांकि बाद में उन्होंने साफ किया कि अमेरिका और चीन के बीच जलडमरूमध्य को खोलने के लिए किसी ठोस योजना पर सहमति नहीं बनी है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या चीन ने कोई विशेष प्रतिबद्धता जताई है, तो उन्होंने जवाब दिया, "नहीं, मैंने यह नहीं कहा कि कोई विशेष समझौता हुआ है। मैंने केवल इतना कहा कि हम इस बात पर सहमत हैं कि जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए।"

इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि चीन ईरान पर अपना कूटनीतिक या आर्थिक प्रभाव डालेगा या समुद्री यातायात बहाल करने के प्रयासों में सीधे शामिल होगा।

बेसेंट ने कहा कि जी20 बैठक के दौरान चीनी अधिकारियों के साथ बातचीत काफी उपयोगी रही। उन्होंने कहा क‍ि चीनी अधिकारियों के साथ हमारी बहुत सकारात्मक और शांत बातचीत हुई। अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा कि अमेरिका के कई सहयोगी देशों ने ईरान के खिलाफ उसके अभियान का समर्थन करने की पेशकश की है। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया और न ही किसी विशेष प्रतिबंध या कदम की घोषणा की।

उन्होंने कहा, "हमारे कई सहयोगी आगे आए और उन्होंने कहा कि जो भी जरूरी होगा, हम वह करने के लिए तैयार हैं।"

बेसेंट के अनुसार, इस मदद में खुफिया जानकारी, आर्थिक खुफिया सूचनाएं और ईरानी सरकार का समर्थन करने वाली संस्थाओं तक पहुंच बनाना शामिल हो सकता है।

बैठक के बाद जारी जी20 अध्यक्षीय बयान में भी ईरान और ऊर्जा व्यापार में आ रही बाधाओं का जिक्र किया गया। बयान में कहा गया कि होर्मुज स्‍ट्रेट में सुरक्षित, स्वतंत्र और भरोसेमंद समुद्री आवाजाही वैश्विक आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।

हालांकि चीन ने इस पैराग्राफ के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक असंतुलन, आईएमएफ की निगरानी और संप्रभु कर्ज से जुड़े कुछ अन्य हिस्सों पर आपत्ति जताई। इसके बावजूद बैठक में मौजूद अन्य जी20 देशों ने बयान का समर्थन किया।

होर्मुज स्‍ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से खाड़ी देशों का तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) एशिया समेत दुनिया के कई बड़े बाजारों तक पहुंचता है।

--आईएएनएस

एवाई/एएस

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