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यूपीआई यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, नया एमडीआर डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को करेगा मजबूत: फोनपे सीईओ

यूपीआई यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, नया एमडीआर डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को करेगा मजबूत: फोनपे सीईओ
यूपीआई यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई शुल्क, नया एमडीआर डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को करेगा मजबूत: फोनपे सीईओ

नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। फोनपे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) समीर निगम ने बुधवार को कहा कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लागू किए गए नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचे के तहत ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए यह कदम जरूरी है।

आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में फोनपे के सीईओ समीर निगम ने स्पष्ट किया कि ग्राहक पहले की तरह ही बिना किसी शुल्क के यूपीआई का उपयोग करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि 1 लाख रुपए से कम वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारी भी एमडीआर व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे।

उन्होंने कहा, "नहीं, यूपीआई ग्राहकों के लिए कोई शुल्क नहीं है। ग्राहकों से यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए कभी शुल्क नहीं लिया गया और भविष्य में भी नहीं लिया जाएगा।"

समीर निगम ने बताया कि बड़े दुकानदारों के मामले में भी 96 प्रतिशत लेनदेन, जो 2,000 रुपए से कम राशि के होते हैं, किसी भी शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे।

उन्होंने बताया कि 2,000 रुपए से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा और इसका भुगतान ग्राहक नहीं, बल्कि व्यापारी करेंगे।

उन्होंने कहा कि एमडीआर से प्राप्त होने वाला राजस्व उन बैंकों और कंपनियों के निवेश को समर्थन देगा जो यूपीआई इकोसिस्टम का हिस्सा हैं।

समीर निगम ने आईएएनएस से कहा, "यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को चालू रखने के लिए उद्योग हर साल कम से कम 10,000 करोड़ रुपए से 12,000 करोड़ रुपए तक खर्च करता है।"

उन्होंने बताया कि केवल तकनीकी ढांचे पर ही नहीं, बल्कि केवाईसी, साइबर सुरक्षा, जोखिम और धोखाधड़ी नियंत्रण, मर्चेंट चार्जबैक और पूंजीगत निवेश पर भी उद्योग को भारी खर्च करना पड़ता है।

उन्होंने कहा, "हमें ऐसा तरीका चाहिए था जिससे यह राजस्व वापस उद्योग में आ सके और यूपीआई का विकास टिकाऊ तरीके से जारी रह सके।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या ग्राहकों को किसी अतिरिक्त शुल्क की चिंता करनी चाहिए, तो उन्होंने कहा कि न व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) और न ही व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई भुगतान पर ग्राहकों के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क होगा।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, "ग्राहकों के लिए कोई शुल्क नहीं है। व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान भी मुफ्त है और व्यक्ति-से-व्यापारी भुगतान भी मुफ्त है।" उन्होंने यह भी कहा कि एमडीआर का भुगतान करने वाले व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर नहीं डाल सकेंगे।

समीर निगम ने आगे कहा कि नए एमडीआर ढांचे के बावजूद भारत का डिजिटल भुगतान बाजार तेजी से बढ़ता रहेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में यूपीआई के करीब 20 करोड़ उपयोगकर्ता थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 50 से 55 करोड़ तक पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि नया राजस्व मॉडल फिनटेक क्षेत्र की निजी कंपनियों को मार्केटिंग, नवाचार, अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश करने में मदद करेगा।

समीर निगम ने कहा, "यह बहुत जरूरी है कि व्यवसायों को उचित आय अर्जित करने का अवसर मिले।"

--आईएएनएस

डीबीपी

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