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कुमारस्वामी का सिद्धारमैया पर हमला, परिवारवाद पर नैतिक अधिकार पर उठाए सवाल

मैसूर, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर तीखा हमला बोलते हुए परिवारवाद के मुद्दे पर उनकी नैतिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि दूसरों की आलोचना करने से पहले उन्हें खुद जवाब देना चाहिए।
कुमारस्वामी का सिद्धारमैया पर हमला, परिवारवाद पर नैतिक अधिकार पर उठाए सवाल

मैसूर, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर तीखा हमला बोलते हुए परिवारवाद के मुद्दे पर उनकी नैतिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि दूसरों की आलोचना करने से पहले उन्हें खुद जवाब देना चाहिए।

मैसूर में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी (दिशा) समिति की बैठक से पहले मीडिया से बातचीत में कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया के परिवारवाद पर दिए बयानों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो नेता अपने बेटे को राजनीति में लाए हैं, क्या उन्हें परिवार आधारित राजनीति पर बोलने का नैतिक अधिकार है?

कुमारस्वामी ने चुनौती देते हुए कहा, “अगर आप खुद को अहिंदा का नेता बताते हैं, तो कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी बनाइए और कम से कम पांच सीटें जीतकर दिखाइए।”

उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया को परिवारवाद पर टिप्पणी करना बंद करना चाहिए, क्योंकि उनके पास न तो नैतिक आधार है और न ही विश्वसनीयता। जनता दल (सेक्युलर) की आलोचना पर उन्होंने कहा कि यह विडंबना है और सिद्धारमैया पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

कुमारस्वामी ने कहा कि अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने बेटे को कोई पद नहीं दिया और न ही किसी जिले की जिम्मेदारी सौंपी। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने अपने पहले बेटे की मृत्यु के बाद दूसरे बेटे को राजनीति में लाया और इसके पीछे के इरादों पर सवाल उठाया।

उन्होंने जनता दल (सेक्युलर) की 58 सीटों की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि इसका श्रेय मुख्य रूप से खुद उन्हें और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा को जाता है, न कि केवल सिद्धारमैया को।

1999 के चुनावों का जिक्र करते हुए कुमारस्वामी ने दावा किया कि उस समय कई नेता हार गए थे और सिद्धारमैया भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में देवगौड़ा ने उन्हें हिम्मत दी और पार्टी को दोबारा खड़ा करने के लिए प्रेरित किया।

कुमारस्वामी ने सिद्धारमैया पर अतीत में पार्टी से विश्वासघात करने का भी आरोप लगाया और कहा कि अहिंदा के जरिए उन्होंने जनता दल को कमजोर किया। उन्होंने चामुंडेश्वरी सीट से सिद्धारमैया की हार का भी जिक्र करते हुए आत्ममंथन करने की सलाह दी।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि कर्नाटक में वह जनता दल (सेक्युलर) के खिलाफ बोलती है, जबकि अन्य राज्यों में गठबंधन करती है। उन्होंने तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम पर निर्भरता और बिहार में कांग्रेस की चुनावी चुनौतियों का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री के कार्यकाल को लेकर पूछे गए सवाल पर कुमारस्वामी ने कहा कि सिद्धारमैया खुद दावा करते हैं कि वह पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे, लेकिन पार्टी हाईकमान का भी जिक्र करते हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया किसी भी हालत में पद छोड़ने वाले नहीं हैं।

अंत में कुमारस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने का सपना देखना सभी का अधिकार है, लेकिन यह महत्वाकांक्षा स्वार्थ से प्रेरित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ इच्छाएं जाहिर करने से लक्ष्य हासिल नहीं होते।

--आईएएनएस

डीएससी

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