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कुमारस्वामी ने कर्नाटक एसआईआर को 'बेमतलब' बताया, प्रक्रिया रद्द करने की मांग

कुमारस्वामी ने कर्नाटक एसआईआर को 'बेमतलब' बताया, प्रक्रिया रद्द करने की मांग
कुमारस्वामी ने कर्नाटक एसआईआर को 'बेमतलब' बताया, प्रक्रिया रद्द करने की मांग

बेंगलुरु, 4 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक में चल रहे मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (एसआईआर) की केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार को आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस चुनावी प्रक्रिया में विश्वसनीयता की कमी है और पूरी प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की।

बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि राज्य में चल रही मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया का 'कोई मतलब नहीं है' और दावा किया कि इसे जिस तरह से किया जा रहा है, उसमें गंभीर खामियां हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य चुनाव अधिकारियों ने उन्हें पहले ही सूचित कर दिया है कि मामला केंद्रीय चुनाव अधिकारियों को भेज दिया गया है और उनसे मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कुमारस्वामी ने कहा, "हमारी मांग है कि अब तक की गई पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से रद्द कर दिया जाए।"

केंद्रीय मंत्री ने यह भी घोषणा की कि वह सोमवार को चुनाव आयोग से मिलने दिल्ली जाएंगे।

उन्होंने कहा, "मैं चुनाव आयोग के सामने यहां हुई सभी घटनाओं का विवरण रखूंगा और उनसे आग्रह करूंगा कि वे चल रही प्रक्रिया को रोकें और यह सुनिश्चित करें कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हो।"

कुमारस्वामी ने एसआईआर में अनियमितताओं को लेकर कर्नाटक सरकार, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद और राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की आलोचना की और इस मुद्दे पर उनकी चुप्पी पर सवाल उठाए।

केंद्रीय मंत्री ने पूछा, "राज्य सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। मुझे नहीं पता कि कांग्रेस अध्यक्ष (मल्लिकार्जुन खड़गे) कहां गायब हो गए हैं। जो लोग हर दिन टिप्पणी करते हैं, वे इस मुद्दे पर क्या कहना चाहते हैं? गृह मंत्री (प्रियांक खड़गे), जो हर दिन हर चीज पर बयान जारी करते हैं, उनकी इस पर क्या प्रतिक्रिया है?"

कुमारस्वामी ने कहा कि जो राजनीतिक नेता दूसरों को नियम-कानूनों का पालन करने का उपदेश देते हैं, उन्हें राज्य में हो रही घटनाओं के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने पूछा, "वे (कांग्रेस) नियम लागू करने और व्यवस्था बनाए रखने की बात करते हैं। एक तरफ, वे फुटपाथ खाली कराने का अभियान चला रहे हैं, लेकिन सड़कों के किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर जो एसआईआर चल रही है, उसका क्या?"

कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकार में थोड़ी भी इज्‍जत या जिम्मेदारी का एहसास है, तो उसे साफ करना चाहिए कि सरकारी अधिकारियों ने ऐसी गतिविधियों में हिस्सा क्यों लिया और चुनाव आयोग को क्या निर्देश दिए गए थे।

उन्‍होंने कर्नाटक सरकार से अपील की कि वे सड़क किनारे सामान बेचने वालों को हटाने की कार्रवाई करने से पहले उनके लिए वैकल्पिक इंतजाम करें। कोर्ट के आदेशों का पालन करने के साथ-साथ लाखों परिवारों की रोजी-रोटी की सुरक्षा भी जरूरी है।

बेंगलुरु में फुटपाथ खाली कराने के चल रहे अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि हर कोई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सम्मान करता है और उन्हें मानता है, लेकिन कर्नाटक सरकार को सड़क किनारे सामान बेचने वालों पर पड़ने वाले असर के बारे में भी सोचना चाहिए।

उन्होंने कहा, "हम सभी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को मानते हैं। लेकिन लाखों परिवार अपनी रोजी-रोटी के लिए सड़क किनारे सामान बेचने पर निर्भर हैं। वे रोज सड़कों पर अपना कारोबार करके गुजारा करते हैं।"

कुमारस्वामी ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में वेंडरों को हटाया जा रहा है, तो कर्नाटक सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह उनकी रोजी-रोटी का क्या होगा, इस पर ध्यान दे।

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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