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यूएन महासभा में जुटेंगे दुनियाभर के नेता, युद्ध और वैश्विक संकट रहेंगे बड़े मुद्दे

यूएन महासभा में जुटेंगे दुनियाभर के नेता, युद्ध और वैश्विक संकट रहेंगे बड़े मुद्दे
यूएन महासभा में जुटेंगे दुनियाभर के नेता, युद्ध और वैश्विक संकट रहेंगे बड़े मुद्दे

संयुक्त राष्ट्र, 21 सितंबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र की उच्चस्तरीय बैठक के लिए 140 देशों के नेता और अन्य 53 देशों के प्रतिनिधि इस हफ्ते एकजुट होंगे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया कई ऐसे युद्धों और संघर्षों का सामना कर रही है, जिनका समाधान निकलना बेहद मुश्किल बना हुआ है।

बैठक की शुरुआत मंगलवार को परंपरा के मुताबिक ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के संबोधन से होगी। उनके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बोलेंगे।

इस दौरान खाड़ी क्षेत्र में चल रहा संघर्ष, यूक्रेन युद्ध, गाजा के हालात और सूडान का गृहयुद्ध संयुक्त राष्ट्र महासभा में चर्चा के बड़े मुद्दे बने रहेंगे। लेख में सूडान के गृहयुद्ध को इतने बड़े पैमाने का बताया गया है कि वहां नरसंहार जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

इस साल चिंताओं की लिस्ट में बेकाबू होती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े खतरे भी जुड़ गए हैं। इसके अलावा जलवायु संकट, आतंकवाद, दुनिया में भुखमरी और गरीबी भी प्रमुख मुद्दे होंगे।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल में होने वाले बड़े-बड़े भाषण इस हाई-लेवल बैठक का सबसे ज्यादा दिखाई देने वाला हिस्सा होते हैं। इन भाषणों में नेता अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हैं, एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं और कई बार वैश्विक समस्याओं को लेकर अहम बातें भी रखते हैं।

असली कूटनीतिक गतिविधियां अक्सर संयुक्त राष्ट्र में देशों के मिशनों, होटलों और यूएन के गलियारों में बनाए गए अस्थायी मीटिंग रूम में होती हैं। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र के गलियारों में होने वाली अनौपचारिक मुलाकातें भी अहम भूमिका निभाती हैं।

आलोचक कह सकते हैं कि नेताओं के भाषणों से इन संकटों का कोई ठोस समाधान सामने नहीं आएगा। हालांकि, आधिकारिक बैठक से अलग होने वाली इन मुलाकातों में कई बार महत्वपूर्ण नतीजे निकल सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पत्रकारों से बातचीत में इस हाई-लेवल वीक की अहमियत बताते हुए कहा क‍ि मेरा मानना है कि हमें इस हफ्ते का फायदा उठाना चाहिए, ताकि मौजूदा संकटों से जुड़े महत्वपूर्ण नेताओं के बीच ज्यादा से ज्यादा बैठकें हो सकें।

उन्होंने कहा, "मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा कि पिछले साल अमेरिका और कई मुस्लिम देशों के बीच एक बेहद अहम बैठक हुई थी, जिससे गाजा के लिए शांति योजना का रास्ता निकला।"

संयुक्त राष्ट्र की लगातार आलोचना करते रहे ट्रंप भी इस मामले में गुटेरेस की बात से सहमत दिखे। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि गाजा के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' बनाने का रास्ता भी पिछले साल हुई उसी बैठक से निकला था।

मौजूदा सत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष चुने गए बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान बैठक की अध्यक्षता करेंगे। वह स्पीकर के मंच से ऊपर बने मुख्य मंच पर बैठेंगे।

इस साल बैठक की थीम है, "भरोसा फिर से कायम करना, बदलाव को संभालना: ऐसा संयुक्त राष्ट्र जो सभी के लिए काम करे।"

जब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्री बारी-बारी से संयुक्त राष्ट्र के सुनहरे निशान वाले गहरे रंग के संगमरमर के मंच से संबोधन देंगे, तब दुनिया के तीन बड़े नेता वहां मौजूद नहीं होंगे। इनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं।

भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। शी जिनपिंग का इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र में मौजूद न होना खास तौर पर ध्यान खींचेगा क्योंकि वह गुरुवार को वॉशिंगटन में ट्रंप से मिलने के लिए अमेरिका आने वाले हैं।

वहीं, एक अहम मौजूदगी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की होगी। वह अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के संबोधन के एक दिन बाद बोलेंगे। मौजूदा संघर्ष में अमेरिका और ईरान एक-दूसरे के विरोधी हैं और लेख के मुताबिक यह संघर्ष अब अपने सातवें महीने में पहुंच चुका है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी बैठक में मौजूद रहेंगे। उनका देश अब रूस के हमले के पांचवें साल का सामना कर रहा है।

वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गुरुवार को महासभा के मंच से संबोधन देंगे। लेख के मुताबिक, वह गाजा में इजरायल की उन कार्रवाइयों का बचाव करेंगे, जिनकी दुनियाभर में काफी आलोचना हुई है।

दूसरी तरफ, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास इस बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि अमेरिका ने उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया है।

--आईएएनएस

एवाई/पीएम

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