पाकिस्तान: केपी में आपातकाल को अधिवक्ताओं ने बताया 'अलोकतांत्रिक'
इस्लामाबाद, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। सिंध हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (एचएचसीबीए) और कराची बार एसोसिएशन (केबीए) ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने के पाकिस्तानी सरकार के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने इसे "लोकतंत्र-विरोधी" बताया और कहा कि सभी अधिवक्ता इसके खिलाफ 'काला दिवस' मनाएंगे।
पाकिस्तानी दैनिक 'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, एचसीएचबीए ने प्रशासन से लोगों के बुनियादी अधिकारों का सम्मान करने और लोकतंत्र को बहाल करने के लिए कदम उठाने की अपील की।
केबीए ने कहा कि अधिवक्ता सोमवार को कोई आधिकारिक काम नहीं करेंगे, और इमरजेंसी व गवर्नर शासन लागू करने पर चर्चा के लिए उन्होंने एक आम बैठक बुलाई। एसोसिएशन ने सभी पार्टियों से खैबर पख्तूनख्वा के लोगों के जनादेश का सम्मान करने और ऐसा कोई कदम न उठाने की अपील की जिससे राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो या लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कम हो।
रविवार को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के चेयरमैन गोहर अली खान ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने की निंदा की और केंद्र सरकार के इस फैसले को "राजनीतिक भूल और अलोकतांत्रिक" बताया।
खान ने एक्स पोस्ट में कहा, "हम प्रांत में इमरजेंसी लागू करने की कड़ी निंदा करते हैं और इस कदम को पूरी तरह से खारिज करते हैं। यह बेहद चिंताजनक और गंभीर राजनीतिक गलती और अलोकतांत्रिक कदम है—लोग अपने अधिकारों के खिलाफ ऐसे कदमों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।"
उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा के लोगों का जनादेश उनका संवैधानिक और कानूनी अधिकार है और "इस जनादेश को नजरअंदाज करके, प्रांतीय स्वायत्तता को कमजोर करके और केंद्र व प्रांत के बीच टकराव पैदा करके" शांति स्थापित नहीं की जा सकती।
गोहर अली खान ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को खत्म करने पर कोई असहमति नहीं है; हालांकि, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का इस्तेमाल लोगों की आवाज दबाने, राजनीतिक मकसद हासिल करने और प्रांत के संवैधानिक अधिकार को सीमित करने के बहाने के तौर पर नहीं किया जा सकता।
गोहर अली खान ने एक्स पर लिखा, "प्रांतों को कमजोर करके संघ को मजबूत नहीं किया जा सकता। समस्याओं का समाधान जोर-जबरदस्ती, टकराव और असाधारण उपायों में नहीं, बल्कि राजनीतिक समझदारी, संविधान की सर्वोच्चता, सार्थक बातचीत और व्यावहारिक कदमों में है। हम जनता के जनादेश, प्रांतीय स्वायत्तता और संवैधानिक व लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक, कानूनी और लोकतांत्रिक मंच पर मजबूत आवाज उठाएंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "ताकतवर प्रांत ही एक मजबूत संघ की नींव होते हैं, और संविधान का शासन ही एक शक्तिसंपन्न पाकिस्तान की गारंटी है। अभी भी समय है; इस फैसले को कुछ दिनों में वापस लिया जा सकता है। संघ को अपना अहंकार छोड़कर जमीनी हकीकत को समझना चाहिए, जायज मांगों को स्वीकार करना चाहिए, और लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। देश को और अधिक राजनीतिक व आर्थिक नुकसान तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पीछे धकेले जाने से बचाना चाहिए। राजनीतिक फैसलों पर पुनर्विचार करना कमजोरी की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में समझदारी की निशानी है—वरना भारी नुकसान होगा।"
वकीलों और पीटीआई चेयरमैन का यह बयान तब आया है जब संघीय सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा के 12 जिलों में आपातकाल लगा दिया और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा कैबिनेट की सिफारिशों को मंजूरी दिए जाने के बाद प्रांत में गवर्नर शासन लागू कर दिया।
--आईएएनएस
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