संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने काबुल अस्पताल में हमले की स्वतंत्र जांच की मांग की
काबुल, 25 मार्च (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने काबुल के पुनर्वास केंद्र पर पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमलों की त्वरित, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है। अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक रिचर्ड बेनेट ने बुधवार को यह बात बताई।
पाकिस्तान ने 16 मार्च को काबुल के एक एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हवाई हमले किए, जिसमें सैकड़ों नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए थे।
बेनेट ने कहा कि इस अपील में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्थायी युद्धविराम, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन, नागरिकों की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
बेनेट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, “हमारा बयान न केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान से स्थायी युद्धविराम पर सहमत होने का आह्वान करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान, नागरिकों की सुरक्षा और जवाबदेही की भी मांग करता है, जिसकी शुरुआत काबुल के अस्पताल की त्वरित, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच से होनी चाहिए।”
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने मंगलवार को पाकिस्तान और अफगानिस्तान से नए सिरे से युद्धविराम घोषित करने का आग्रह किया।
विशेषज्ञों ने कहा, “हम पाकिस्तान और अफगानिस्तान के वास्तविक शासकों से स्थायी युद्धविराम के लिए प्रतिबद्ध होने, संघर्ष के मूल कारणों को हल करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।”
उन्होंने कहा कि 26 फरवरी से अब तक अफगानिस्तान में कम से कम 289 नागरिक हताहत हुए हैं, जिनमें 76 की मौत और 213 घायल हुए हैं, जबकि 1,15,000 से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।
विशेषज्ञों ने कहा, “नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिसमें चिकित्सा सुविधाएं, घर, बाजार और विस्थापित लोगों के ठिकाने शामिल हैं। स्कूल और सीमाएं बंद कर दी गई हैं और व्यापार निलंबित है।”
विशेषज्ञों के अनुसार, 16 मार्च को काबुल के एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में संभवतः सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए।
उन्होंने कहा, “हम इस हमले की निंदा करते हैं, पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।”
विशेषज्ञों ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने, विशेष रूप से नागरिकों और उनके ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
उन्होंने सभी कथित उल्लंघनों की त्वरित, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।
विशेषज्ञों ने कहा कि हालिया संघर्ष 21-22 फरवरी को पाकिस्तान की ओर से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों, 26 फरवरी को अफगान अधिकारियों की ओर से सीमा पर जवाबी हमलों और 27 फरवरी को पाकिस्तान की ओर से काबुल, कंधार और अन्य स्थानों पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ।
विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा, “अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-2 और प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बल प्रयोग पर प्रतिबंध का उल्लंघन करता है। आत्मरक्षा का अधिकार तभी होता है, जब पहले तालिबान ने पाकिस्तान पर हमला किया हो या टीटीपी को हमले के लिए भेजा हो।”
उन्होंने यह भी कहा, “पाकिस्तान ने यह साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत प्रस्तुत नहीं किया है कि उसके क्षेत्र में हुए टीटीपी हमले अफगानिस्तान के वास्तविक शासकों की ओर से निर्देशित या नियंत्रित थे।”
--आईएएनएस
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