यूएन प्रमुख ने फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा देने से अमेरिका के इनकार पर अफसोस जताया
संयुक्त राष्ट्र, 19 सितंबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता के मुताबिक, महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने फिलिस्तीनी अधिकारियों को अमेरिका द्वारा वीजा न दिए जाने पर दुख व्यक्त किया है। इस वीजा पाबंदी की वजह से फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास इस साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे।
गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, "महासचिव को अमेरिका की उस घोषणा पर गहरा अफसोस है जिसमें उन प्रतिबंधों को बढ़ाया गया है, जिनके तहत फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन के सदस्यों और फ़िलिस्तीनी अथॉरिटी के अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में शामिल होने के लिए वीजा नहीं दिया जाएगा।"
गुटेरेस ने मेजबान देश अमेरिका से आग्रह किया है कि वह 1947 के यूएन-यूएस मुख्यालय समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए सभी प्रतिनिधिमंडलों को वीजा जारी करना सुनिश्चित करे। प्रवक्ता ने कहा कि गुटेरेस इस मामले पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत जारी रखेंगे।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को इस वर्ष की आम चर्चा (जनरल डिबेट) में आभासी रूप (वर्चुअल) से भाग लेने की अनुमति दे दी है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, यह फैसला अमेरिकी विदेश विभाग की उस घोषणा के ठीक एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने अब्बास सहित फिलिस्तीनी अधिकारियों को वीजा देने से इनकार कर दिया था। इस प्रतिबंध के कारण राष्ट्रपति अब्बास लगातार दूसरे वर्ष संयुक्त राष्ट्र के इस उच्च स्तरीय वार्षिक सत्र में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो सकेंगे।
अमेरिका द्वारा न्यूयॉर्क आने के लिए वीज़ा देने से इनकार करने के बाद, भारत ने अब्बास को अगले हफ़्ते होने वाली उच्च स्तरीय बैठक को वीडियो लिंक के ज़रिए संबोधित करने की अनुमति देने वाले महासभा के प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है। यह प्रस्ताव बुधवार को भारी बहुमत से पारित हुआ, जिसमें इसे 152 वोट मिले। केवल अमेरिका, इजरायल और पैराग्वे ने इसके खिलाफ वोट दिया और चार अन्य देशों ने औपचारिक रूप से वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
यह दूसरी बार होगा जब अब्बास असेंबली में वीडियो के ज़रिए हिस्सा लेंगे। उन्होंने पिछले साल भी वीजा न मिलने के बाद ऐसा ही किया था। अमेरिका का कहना है कि फिलिस्तीन की नीति अभी भी आतंकवाद के पक्ष में है। अमेरिका की उप स्थायी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने कहा, "हम अपनी इस मांग पर अड़े रहेंगे कि फिलिस्तीनी अथॉरिटी और पीएलओ (फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन, जो अथॉरिटी को नियंत्रित करता है) पूरी तरह से और बिना किसी शर्त के आतंकवाद को छोड़ दें। उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है।"
हालांकि दिलचस्प बात यह भी है कि अमेरिका ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अरागची को उच्च स्तरीय सत्र में भाग लेने के लिए वीजा दिया है। ईरान एक ऐसा देश है जिसके साथ अमेरिका कई महीनों से सैन्य संघर्ष में उलझा हुआ है।
--आईएएनएस
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