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यूसीसी सामाजिक न्याय और संवैधानिक भावना को मजबूत करेगा: असम भाजपा

गुवाहाटी, 27 मई (आईएएनएस)। असम विधानसभा में भाजपा के वरिष्ठ विधायक बिमल बोरा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का जोरदार समर्थन करते हुए इसे सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।
यूसीसी सामाजिक न्याय और संवैधानिक भावना को मजबूत करेगा: असम भाजपा

गुवाहाटी, 27 मई (आईएएनएस)। असम विधानसभा में भाजपा के वरिष्ठ विधायक बिमल बोरा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का जोरदार समर्थन करते हुए इसे सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।

विधानसभा के चल रहे सत्र में यूसीसी विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए बोरा ने कहा कि यह सिर्फ एक कानूनी प्रस्ताव नहीं, बल्कि भारत की विविधता में एकता की सांस्कृतिक भावना का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, “यह विधेयक केवल कानूनी ढांचा नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक एकता, सामाजिक न्याय और संवैधानिक चेतना को दर्शाता है।”

भारत की विविधता का उल्लेख करते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी और पूर्वोत्तर से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक भाषा, परंपराएं और रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं, लेकिन देश की आत्मा एक है।

उन्होंने कहा, “भारत विविधताओं में एकता वाला राष्ट्र है। भाषाएं, परंपराएं और संस्कृतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी भावना एक ही है।”

बोरा ने कहा कि समान नागरिक संहिता की अवधारणा संविधान की उस मूल भावना से जुड़ी है, जिसमें सभी नागरिकों को धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर समान अधिकार और समान न्याय देने की बात कही गई है।

उन्होंने राज्य के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 44 का हवाला देते हुए कहा कि संविधान निर्माताओं ने पूरे देश में समान नागरिक ढांचा लागू करने की कल्पना की थी।

उन्होंने कहा, “यूसीसी का विचार अचानक या मनमाना नहीं है। यह संविधान निर्माताओं की सोच का हिस्सा था।”

भाजपा विधायक ने “एक राष्ट्र, एक कानून” की अवधारणा को पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने विधानसभा में यूसीसी विधेयक लाने का अपना वादा पूरा किया है।

बोरा ने कहा कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विशेष रूप से सभी समुदायों की महिलाओं को सम्मान और न्याय सुनिश्चित करना है।

उन्होंने लैंगिक समानता और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में कई कानूनी प्रावधान महिलाओं के साथ असमानता पैदा करते हैं।

असम की सामाजिक विविधता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि विवाह और परिवार की परंपराएं समाज की मजबूत नींव हैं और यह विधेयक परिवारों में सामाजिक जिम्मेदारी और स्थिरता को मजबूत करने का प्रयास करता है।

अंत में उन्होंने विधानसभा में इस “ऐतिहासिक” विधेयक को पेश करने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का आभार जताया।

--आईएएनएस

डीएससी

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