वैष्णो देवी ट्रैक पर बिना पोनी कार्ड काम कर रहे थे दो टट्टू संचालक, रियासी पुलिस ने दर्ज किया मामला
जम्मू, 11 अगस्त (आईएएनएस)। मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में श्री माता वैष्णो देवी ट्रैक पर दो अवैध टट्टू संचालकों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया।
पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया, "त्रिकूट पहाड़ियों पर स्थित गुफा मंदिर जाते समय बाणगंगा चेक पॉइंट पर काकरा गांव के राज सिंह और ठकराकोट गांव के अभिषेक सिंह को रोका गया और पाया गया कि वे बिना वैध पोनी कार्ड के काम कर रहे थे।"
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को आने वाले स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इसी के तहत रास्ते पर काम करने वाले पोनी, पिट्ठू (पोर्टर) और पालकी ऑपरेटरों की जांच के लिए अचानक चेक पॉइंट बनाया गया था।
प्रवक्ता ने आगे बताया कि कटरा पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ कानून की संबंधित धाराओं के तहत दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं।
पुलिस ने दोहराया कि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए, पोनी और पालकी संचालन से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, खासकर उन इलाकों में जहां तीर्थयात्रियों की भारी आवाजाही होती है।
श्री माता वैष्णो देवी मंदिर जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के कटरा इलाके में त्रिकूट पर्वत पर 5,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक पवित्र हिंदू तीर्थ स्थल है।
तीर्थयात्री कटरा स्थित बेस कैंप से लगभग 12 से 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके मंदिर तक पहुंचते हैं, जहां वे गर्भगृह में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का प्रतिनिधित्व करने वाली तीन प्राकृतिक चट्टानी पिंडियों के दर्शन करते हैं।
जम्मू शहर से लगभग 43 किलोमीटर दूर स्थित कटरा कस्बा इस मंदिर का बेस कैंप है।
मंदिर तक की यात्रा कटरा से पवित्र गुफा तक लगभग 12 से 13 किलोमीटर की चढ़ाई वाली पैदल यात्रा है।
तीर्थयात्रियों के पास कटरा से सांझीछत तक जाने के लिए पैदल चलने, पोनी की सवारी, इलेक्ट्रिक ऑटो सेवा, पालकी और हेलीकॉप्टर सेवा जैसे विकल्प मौजूद हैं।
गुफा के अंदर कोई मूर्ति या प्रतिमा नहीं है; पूजा तीन प्राकृतिक चट्टानी आकृतियों (पिंडियों) की की जाती है।
यह मंदिर देवी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की संयुक्त दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है।
मान्यता है कि देवी ने गुफा के ठीक बाहर राक्षस भैरवनाथ का वध किया था। मरने से पहले उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और देवी ने उसे वरदान दिया कि पास ही स्थित भैरवनाथ मंदिर के दर्शन के बिना यह तीर्थयात्रा पूरी नहीं मानी जाएगी। इस तीर्थस्थल का प्रबंधन 1986 में स्थापित 'श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड' द्वारा किया जाता है।
इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष के तौर पर उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा इसका नेतृत्व करते हैं।
--आईएएनएस
एससीएच

