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पाकिस्तानी सेना पर दो बलूच युवकों को अगवा करने का आरोप, मानवाधिकार संगठन ने सरकार से मांगा जवाब

पाकिस्तानी सेना पर दो बलूच युवकों को अगवा करने का आरोप, मानवाधिकार संगठन ने सरकार से मांगा जवाब
पाकिस्तानी सेना पर दो बलूच युवकों को अगवा करने का आरोप, मानवाधिकार संगठन ने सरकार से मांगा जवाब

क्वेटा, 18 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में दो और नागरिकों के कथित रूप से जबरन गायब किए जाने का मामला सामने आया है। मानवाधिकार संगठन बलूच वॉइस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने इन लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन उनके ठिकाने की जानकारी नहीं दी गई है।

शनिवार को संगठन ने इसका खुलासा किया। उन्होंने बताया कि बलूच छात्र संगठन बलूच स्टूडेंट फ्रंट (बीएसएफ) के केंद्रीय नेता फजल बलूच को शुक्रवार तड़के बलूचिस्तान के हब चौकी क्षेत्र स्थित उनके घर से सुरक्षाकर्मी ले गए। बीवीजे का कहना है कि इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।

मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से मांग की, "फजल बलूच की स्थिति और ठिकाने की तुरंत जानकारी दी जाए, उन्हें परिवार और वकील से मिलने की अनुमति दी जाए, या यदि हिरासत का कोई कानूनी आधार है तो उन्हें सक्षम नागरिक अदालत के सामने पेश किया जाए।"

बीवीजे ने एक अन्य छात्र शहाब बलूच मामले का भी जिक्र किया। संगठन का आरोप है कि अजरबैजान में पढ़ाई कर रहे शहाब बलूच को गर्मी की छुट्टियों में बलूचिस्तान लौटने के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कथित रूप से गायब कर दिया।

बीवीजे ने कहा कि बलूच छात्रों को निशाना बनाकर जबरन गायब करने की घटनाएं कोई अलग-थलग मामला नहीं हैं, बल्कि शिक्षित बलूच युवाओं के खिलाफ बढ़ते पैटर्न का हिस्सा हैं।

बलूच वुमेन फोरम (बीडब्ल्यूएफ) की केंद्रीय आयोजक शाली बलूच ने आरोप लगाया कि एक सप्ताह के भीतर बलूचिस्तान में कई युवाओं को कथित तौर पर जबरन गायब किया गया है। उन्होंने इसे बलूच छात्रों और शिक्षित युवाओं के खिलाफ कार्रवाई तेज होने का संकेत बताया।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, "बलूच छात्रों और स्नातकों को निशाना बनाया जाना राजनीतिक चेतना को कमजोर करने और असहमति को दबाने की कोशिश है।"

बलूच कार्यकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे कथित रूप से गायब सभी युवाओं के ठिकाने का पता लगाने, उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने और पाकिस्तान से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का पालन कराने के लिए कदम उठाएं।

--आईएएनएस

केआर/

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