ट्विशा शर्मा मर्डर मामले में परिवार वालों ने दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग की, जांच में हेरफेर का लगाया आरोप
भोपाल, 19 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार को ट्विशा के परिवार ने एक बार फिर मामले में दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने और जांच को मध्य प्रदेश से बाहर दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग तेज कर दी।
परिवार का आरोप है कि इस पूरे मामले में प्रभावशाली लोगों का दबाव है, जांच को प्रभावित किया जा रहा है और न्यायिक प्रक्रिया में भी हस्तक्षेप हो रहा है।
ट्विशा शर्मा की मां रेखा शर्मा ने आईएएनएस से कहा कि पिछले कई दिनों से उनका परिवार इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
उन्होंने कहा, "मैं दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग कर रही हूं और चाहती हूं कि हमारा केस जल्द से जल्द दिल्ली ट्रांसफर किया जाए। यहां हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है। पिछले 5-6 दिनों से हम रोज अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही।"
वहीं, ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने दूसरे पोस्टमॉर्टम की अनुमति नहीं मिलने पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पहले इस जांच की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में उसे रोक दिया गया, जो साफ तौर पर प्रभाव और दबाव को दिखाता है।
ट्विशा के पिता ने कहा, "अगर मामला कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में था तो अनुमति पहले कैसे मिल गई और बाद में क्यों रोक दी गई? यह साफ तौर पर प्रभाव का मामला है। न्यायिक प्रक्रिया में किसी के अधिकारों में दखल देना गलत है।"
नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने पूरे मामले को अपने पक्ष में मोड़ लिया है और जांच को प्रभावित कर रहे हैं।
ट्विशा के पिता ने कहा, "उन्होंने पहले ही झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी और पूरे सिस्टम को अपने पक्ष में कर लिया। ये बहुत प्रभावशाली लोग हैं। आपने देखा कि उन्हें अग्रिम जमानत भी मिल गई। जमानत की सुनवाई के दौरान खुद पुलिस ने अदालत में कहा कि ये लोग प्रभावशाली हैं। जब पुलिस खुद मान रही है कि आरोपी प्रभावशाली हैं, तो फिर एक आरोपी को खुला क्यों छोड़ा गया ताकि वह मामले को प्रभावित कर सके?"
ट्विशा के पिता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष लगातार मीडिया में बयान देकर मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। इतने वरिष्ठ जज कानून को अच्छी तरह जानते हैं। अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी मीडिया में लगातार बयान देना और केस को प्रभावित करने की कोशिश करना उनकी गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह एक आपराधिक मानसिकता को दिखाता है।
इस दौरान रिटायर्ड मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने भी परिवार का समर्थन करते हुए प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि ट्विशा की मौत सामान्य मामला नहीं है और इस पूरे प्रकरण में प्रभावशाली लोगों का दबदबा साफ दिखाई देता है।
उन्होंने कहा, "आपने देखा कि हमारी बहन ट्विशा के साथ क्या हुआ। इसे दहेज हत्या कहें, हत्या कहें या कुछ और, लेकिन सच सामने आना बाकी है। देश में कई दहेज हत्याएं होती हैं, कई अन्य मौतें भी होती हैं, लेकिन यह मामला बिल्कुल अलग है। इस घटना को प्रभावशाली लोगों ने अंजाम दिया और उसके बाद पूरा प्रशासन, पुलिस विभाग और बाकी सिस्टम एक ही पक्ष में खड़ा नजर आया। ऐसा लग रहा है जैसे यहां कानून नाम की कोई चीज बची ही नहीं है।"
उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों में जवाबदेही और कानून का डर होना बेहद जरूरी है। जो लोग सिस्टम को अपनी निजी जागीर समझते हैं और पुलिस थाने में आने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ मनमानी करते हैं, उनमें भी कानून का डर और जवाबदेही की भावना होनी चाहिए। हम लोग बुधवार को मोटर रैली निकालने का प्लान कर रहे हैं।
--आईएएनएस
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