Samachar Nama
×

ट्विशा शर्मा हत्याकांड: सीबीआई ने दिल्ली ट्रायल का किया समर्थन, गवाहों को धमकाने की आशंका जताई

ट्विशा शर्मा हत्याकांड: सीबीआई ने दिल्ली ट्रायल का किया समर्थन, गवाहों को धमकाने की आशंका जताई
ट्विशा शर्मा हत्याकांड: सीबीआई ने दिल्ली ट्रायल का किया समर्थन, गवाहों को धमकाने की आशंका जताई

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मृत्यु से संबंधित मामले में पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह द्वारा मुकदमे की कार्यवाही को प्रभावित करने और गवाहों को धमकाने की पूरी संभावना है। सीबीआई ने भोपाल से दिल्ली में मुकदमे के स्थानांतरण की याचिका का समर्थन किया है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक प्रति-हलफनामे में जांच एजेंसी ने कहा कि सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह भोपाल में एक प्रभावशाली शख्सियत हैं और सत्र न्यायालय में लंबित कार्यवाही की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं। सीबीआई ने अपने हलफनामे में कहा कि प्रतिवादी संख्या दो गिरिबाला सिंह मामले की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती हैं और गवाहों को डरा सकती हैं।

यह प्रतिवाद ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा दायर स्थानांतरण याचिका के जवाब में दायर किया गया था, जिसमें भोपाल के दसवें जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित आपराधिक मुकदमे को दिल्ली की किसी सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की गई थी।

सीबीआई ने आगे कहा कि गिरिबाला सिंह जिला न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थीं और घटना के समय भोपाल के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की अध्यक्ष थीं। वह अपने पद और संपर्कों के कारण मुकदमे की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती थीं।

जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि उनका बेटा समर्थ सिंह मृतका का पति और इस मामले में सह-आरोपी है। वह भी भोपाल में वकालत करता है।

सीबीआई ने जांच का हवाला देते हुए दावा किया कि गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की मौत के बाद सबूतों को संभालने में हस्तक्षेप किया और घटनास्थल को बदलने और सबूतों से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया।

हलफनामे में कहा गया कि जांच में यह साबित हुआ है कि गिरिबाला सिंह ने एक तकनीशियन को बुलाया और संबंधित अवधि से संबंधित सीसीटीवी फुटेज की प्रतियां प्राप्त कीं। इसमें आगे कहा गया है कि 13 मई, 2026 को उन्होंने एक्सप्रेशन ब्यूटी पार्लर के मालिक से संपर्क करके ट्विशा के पिछले दिन के दौरे के बारे में पूछताछ की और कुछ व्यक्तियों के माध्यम से संबंधित सीसीटीवी फुटेज एकत्र करने की व्यवस्था की।

सीबीआई ने कहा कि इन परिस्थितियों के साथ-साथ पूर्व जिला न्यायाधीश के रूप में उनकी स्थिति से मुकदमे को प्रभावित करने और गवाहों को डराने-धमकाने की संभावना पर संदेह पैदा होता है।

12 मई, 2026 की रात को ट्विशा अपने ससुराल भोपाल में फांसी पर लटकी हुई मिली और एम्स भोपाल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद, उसके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं के तहत दहेज को लेकर क्रूरता और उत्पीड़न के आरोप में कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई।

मध्य प्रदेश सरकार ने बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी, जिसने सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान के बाद 25 मई, 2026 को मामले को पुनः दर्ज किया। जांच एजेंसी ने कहा कि उसने 17 अगस्त, 2026 को दो आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 85, 108 और 3(5) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोपपत्र दाखिल किया, जबकि दहेज हत्या, दहेज और अन्य पहलुओं से संबंधित आगे की जांच जारी है।

इसमें आगे कहा गया है कि निचली अदालत ने अपराधों का संज्ञान लिया है और कार्यवाही आरोप तय करने पर बहस के चरण तक पहुंच गई है, जिसकी अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को निर्धारित है।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 16 अक्टूबर को भोपाल अदालत में चल रहे मुकदमे पर रोक लगा दी थी और नवनिधि शर्मा द्वारा दायर स्थानांतरण याचिका पर सीबीआई, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को नोटिस जारी किया था।

मृतक के पिता ने आशंका व्यक्त की है कि उनकी बेटी को मध्य प्रदेश में निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी, उन्होंने उसकी सास के प्रभाव और प्रारंभिक जांच और जमानत कार्यवाही के संचालन को लेकर चिंता व्यक्त की है।

शुक्रवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध कम्प्यूटरीकृत मामले की स्थिति के अनुसार, स्थानांतरण याचिका की सुनवाई संभावित रूप से 19 नवंबर को होगी।

--आईएएनएस

एमएस/

Share this story

Tags