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ट्रंप का दावा, ईरान का खतरा काफी हद तक बेअसर हो गया है

वाशिंगटन, 8 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमताएं काफी कमजोर हो गई हैं और यह संघर्ष "अंतहीन युद्ध" नहीं बनेगा। उन्होंने तर्क दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका तेहरान के साथ परमाणु समझौते को सुरक्षित करने या सैन्य साधनों के माध्यम से अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के करीब है।
ट्रंप का दावा, ईरान का खतरा काफी हद तक बेअसर हो गया है

वाशिंगटन, 8 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य क्षमताएं काफी कमजोर हो गई हैं और यह संघर्ष "अंतहीन युद्ध" नहीं बनेगा। उन्होंने तर्क दिया कि संयुक्त राज्य अमेरिका तेहरान के साथ परमाणु समझौते को सुरक्षित करने या सैन्य साधनों के माध्यम से अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के करीब है।

एनबीसी के 'मीट द प्रेस' कार्यक्रम में एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब केवल अपने मिसाइल भंडार का एक छोटा सा हिस्सा ही बचा है। महीनों तक चली अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान से उत्पन्न खतरा काफी हद तक कम हो गया है।

ईरान की शेष सैन्य क्षमता के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, "शायद उनके पास 21-22 प्रतिशत मिसाइलें बची हैं। यह काफी संख्या में मिसाइलें हैं। लेकिन यह वैसी नहीं हैं, जैसी तब थीं जब हमने पहली बार हमला किया था।"

जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका एक और लंबे मध्य पूर्व संघर्ष में फंसने के खतरे का सामना कर रहा है, तो ट्रंप ने इस तुलना को खारिज कर दिया और कहा कि ईरान के खिलाफ चलाया गया अभियान इस क्षेत्र में पहले हुए अमेरिकी युद्धों से बहुत अलग है। उन्होंने कहा, "मुझे ये अंतहीन युद्ध पसंद नहीं हैं। यह कोई अंतहीन युद्ध नहीं है।"

यह साक्षात्कार ऐसे समय हुआ जब संघर्ष को 100 दिन पूरे हो चुके थे और प्रशासन की दीर्घकालिक रणनीति और वार्ता के माध्यम से समाधान की संभावनाओं पर सवाल उठते जा रहे थे।

ट्रंप ने तर्क दिया कि अमेरिकी सैन्य अभियानों ने पहले ही प्रमुख लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। उन्होंने कहा, "हमने उनकी सेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, ईरान के अधिकांश ड्रोन कारखाने, प्रक्षेपण स्थल और मिसाइल उत्पादन ठिकाने नष्ट कर दी गई हैं।"

राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान की सैन्य अवसंरचना को शीघ्रता से पुनर्निर्मित करने की क्षमता को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया है।

ट्रंप ने कहा, "उन्हें पुनर्निर्माण में 15 या 20 साल लगेंगे। लेकिन मैं उन्हें यह मौका भी नहीं देने वाला। हम ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दे सकते। और हम ऐसा होने नहीं देंगे।"

जब उनसे पूछा गया कि यदि वार्ता विफल हो जाती है तो पुनः सैन्य कार्रवाई किस आधार पर की जाएगी, तो ट्रंप ने कहा, "मेरी लक्ष्मण रेखा तब होगी जब मुझे लगेगा कि मैं कोई समझौता नहीं कर पाऊंगा, या अगर मैं पर्याप्त तेज़ी से समझौता नहीं कर पाऊंगा।"

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि वार्ता समापन के करीब है।

ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि हम बहुत करीब हैं, अगर कूटनीति विफल रही, तो हम इसे सैन्य रूप से समाप्त कर देंगे।"

ट्रंप ने उन सुझावों को भी खारिज कर दिया कि यह संघर्ष नए युद्धों से बचने के उनके लंबे समय से चले आ रहे चुनावी वादे के विपरीत है। उन्होंने कहा, "मैंने कुछ भी वादा नहीं किया था। मुझे ये अंतहीन युद्ध पसंद नहीं हैं, यह अभियान आवश्यक था, क्योंकि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की ओर बढ़ रहा था।

जब उनसे पूछा गया कि उन्हें किस बात का भरोसा है कि संघर्ष दलदल में नहीं बदलेगा, तो ट्रंप ने जवाब दिया, "हम उस स्थिति में नहीं पहुंचने वाले हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका 'लगभग तैयार' है और उसे या तो एक 'मजबूत समझौता' या टकराव का निर्णायक निष्कर्ष मिलने की उम्मीद है।"

--आईएएनएस

ओपी/एएस

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